क्या इंसानों के पूर्वज अपने ही लोगों को खा जाते थे? सुनने में यह किसी हॉरर फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन स्पेन में हुई एक नई पुरातात्विक खोज ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है. वैज्ञानिकों को करीब 8.5 लाख साल पुरानी एक गुफा से ऐसे इंसानी अवशेष मिले हैं, जिन पर कटने और मांस अलग करने के साफ निशान हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह इस बात के मजबूत सबूत हैं कि उस दौर में इंसानों के एक प्राचीन पूर्वज अपने ही समुदाय के लोगों का मांस खाते थे.
मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह खोज उत्तरी स्पेन के बुर्गोस स्थित ग्रान डोलीना गुफा से हुई है. यहां कैटलन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन पेलियोइकोलॉजी एंड सोशल इवोल्यूशन के वैज्ञानिक कई वर्षों से खुदाई कर रहे हैं.
इंसानों की हड्डियां और दांत मिले
हालिया खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को करीब दो दर्जन हड्डियां और दांत मिले हैं. इनमें खोपड़ी, रीढ़, हाथ और पैर की हड्डियों के टुकड़े और तीन दांत शामिल हैं. ये सभी अवशेष होमो एंटेसेसर नाम की विलुप्त मानव प्रजाति के बताए जा रहे हैं, जो करीब 7.7 लाख से 12 लाख साल पहले यूरोप में रहती थी.
हड्डियों पर मिले काटने के निशान
वैज्ञानिकों ने जब इन हड्डियों की जांच की तो उन पर पत्थर के औजारों से काटने और मांस अलग करने के स्पष्ट निशान मिले. यही नहीं, इससे पहले इसी गुफा से मिले बच्चों की हड्डियों पर भी ऐसे ही निशान पाए गए थे.
अब पहली बार वयस्क लोगों की हड्डियों पर भी यही सबूत मिलने के बाद शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय नरभक्षण सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था, बल्कि बड़े लोगों को भी मारकर खाया जाता था.
गुफा में रहते थे 13 से 15 लोग
नई खोज से यह भी पता चला है कि उस समय इस गुफा में लगभग 13 से 15 लोग रहते थे. पहले वैज्ञानिकों का अनुमान इससे कम लोगों का था. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से उन्हें उस समय के इंसानों की आबादी, सामाजिक जीवन और रहन-सहन को पहले से बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.
ग्रान डोलीना गुफा में 1990 के दशक से लगातार खुदाई हो रही है. यहीं पहली बार होमो एंटेसेसर के जीवाश्म मिले थे. साल 2025 में भी इसी गुफा से एक बच्चे की गर्दन की हड्डी मिली थी, जिसने वैज्ञानिकों को चौंका दिया था. वह बच्चा सिर्फ दो से चार साल का था. उसकी गर्दन काटी गई थी और हड्डियों पर ऐसे निशान थे, जैसे किसी जानवर का मांस काटा जाता है.
शोध का नेतृत्व करने वाली पुरातत्वविद पालमिरा सलाडी ने तब कहा था कि उस बच्चे के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया गया, जैसा किसी शिकार किए गए जानवर के साथ किया जाता है. उनके मुताबिक, इस बात की पूरी संभावना है कि बच्चे को मारने के बाद उसका मांस खाया गया.
नई खोज ने बदल दी वैज्ञानिकों की सोच
पालमिरा सलाडी का कहना है कि अब तक ज्यादातर बच्चों और किशोरों के अवशेष ही मिले थे. इसलिए यह स्पष्ट नहीं था कि नरभक्षण किन लोगों तक सीमित था. लेकिन अब वयस्कों की हड्डियों पर भी वही कटने के निशान मिलने के बाद तस्वीर काफी साफ हो गई है. उनके अनुसार, यह खोज होमो एंटेसेसर की जीवनशैली, आबादी और सामाजिक व्यवहार को समझने में एक बड़ा मोड़ साबित होगी.
शोधकर्ता आंद्रेउ ओले का कहना है कि अब उनके पास इस प्राचीन मानव समूह की पहले से कहीं ज्यादा पूरी तस्वीर मौजूद है.
सिर्फ इंसानों की हड्डियां ही नहीं मिलीं
गुफा से इंसानी अवशेषों के अलावा पत्थर से बने कई औजार भी मिले हैं. ये औजार चकमक पत्थर, क्वार्ट्ज और बलुआ पत्थर से बनाए गए थे.
इसके अलावा लकड़बग्घा, हिरण, बीवर, घोड़े और गैंडे जैसे जानवरों की हड्डियां भी मिली हैं. इससे वैज्ञानिकों को उस दौर के पर्यावरण और इंसानों के खान-पान को समझने में मदद मिल रही है.
क्या साबित हुई नरभक्षण की बात?
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज इस बात के मजबूत संकेत देती है कि होमो एंटेसेसर अपने ही समुदाय के लोगों का मांस खाते थे. हालांकि, यह अभी भी शोध का विषय है कि ऐसा भोजन की कमी की वजह से होता था, या किसी हिंसक संघर्ष के कारण या फिर यह उनकी किसी सामाजिक या सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा था.
यह भी पढ़ें: गुलामों का द्वीप... जहां जन्म लेते ही बच्चों पर हो जाता है मालिक का हक
फिलहाल, स्पेन की यह 8.5 लाख साल पुरानी गुफा इंसानी इतिहास के उन रहस्यों से पर्दा उठा रही है, जो आज भी वैज्ञानिकों को हैरान कर रहे हैं.
aajtak.in