इंडोनेशिया के एक प्रांत में शादी के बाहर संबंध बनाने के आरोप में एक महिला और पुरुष को सार्वजनिक तौर पर 100-100 कोड़े मारने की सजा दी गई. सजा के दौरान महिला दर्द से कराहती और रहम की गुहार लगाती नजर आई. आखिरकार वह जमीन पर गिर पड़ी.
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला इंडोनेशिया के आचे प्रांत की राजधानी बांदा आचेह का है. यहां गुरुवार यानी 17 सितंबर को शरिया कानून के तहत कई लोगों को अलग-अलग अपराधों में सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा दी गई. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, व्यभिचार के मामले में दोषी ठहराए गए दो लोगों को 100-100 कोड़े लगाए गए.
महिला दर्द से तड़पती रही, फिर जमीन पर गिर पड़ी
सजा के दौरान महिला दर्द से बुरी तरह परेशान नजर आई. तस्वीरों में वह हाथ उठाकर रहम की अपील करती दिखी. इसके बाद वह दर्द सहते-सहते जमीन पर गिर पड़ी. उसके साथ मौजूद पुरुष को भी 100 कोड़ों की सजा दी गई. लेकिन 60 कोड़े पूरे होने के बाद उसकी हालत को देखते हुए सजा कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी.
बांदा आचेह के अभियोजन कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी दारमा मुस्तिका ने बताया कि उस समय उसकी सेहत को लेकर चिंता हुई थी. उसे आराम करने का मौका दिया गया. इसके बाद सजा दोबारा शुरू की गई और 100 कोड़े पूरे किए गए.
बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग बने गवाह
इस पूरी कार्रवाई को सार्वजनिक जगह पर किया गया, जिसे देखने के लिए काफी लोग मौजूद थे. भीड़ में बच्चे भी शामिल थे. आचे इंडोनेशिया का ऐसा प्रांत है जहां स्थानीय स्तर पर इस्लामी शरिया आधारित आपराधिक नियम लागू हैं. यहां कुछ मामलों में सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा का प्रावधान है.
आचे के स्थानीय शरिया कानून के तहत शादी से पहले या शादी के बाद अपने साथी के अलावा किसी और से संबंध बनाना और व्यभिचार के अलावा पुरुषों और महिलाओं के आपस में घुलने-मिलने, शराब पीने और जुआ खेलने जैसे मामलों में भी सजा का प्रावधान है.
हाल की कार्रवाई में सिर्फ दो लोगों को 100-100 कोड़े नहीं लगाए गए. दूसरे मामलों में भी कई लोगों को कम संख्या में कोड़े मारे गए. स्थानीय मीडिया AJNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई में कुल 11 दोषियों को अलग-अलग मामलों में सजा दी गई. इनमें व्यभिचार के दो मामलों में चार लोगों को 100-100 कोड़े की सजा मिली थी, जबकि दूसरे मामलों में सजा की संख्या कम थी.
17 सितंबर की एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, आठ लोगों को पुरुषों और महिलाओं के आपस में घुलने-मिलने यानी 'इख्तिलात' के मामले में 16 से 21 कोड़े तक लगाए गए.
जन्मदिन की पार्टी में साथ होना भी पड़ा भारी
इसी कार्रवाई में कुछ लोगों को एक जन्मदिन की पार्टी में पुरुषों और महिलाओं के साथ घुलने-मिलने के मामले में दोषी पाया गया. इन लोगों को व्यभिचार के मामले की तुलना में कम सजा दी गई.अलग-अलग लोगों को 16, 17, 19 और 21 कोड़े लगाए गए.
आचे के इन नियमों में ऐसे पुरुष और महिलाओं का मेल-जोल भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जो आपस में परिवार के सदस्य या पति-पत्नी नहीं हैं. आचे में शरिया आधारित नियमों के तहत पुरुष और महिला के बीच शारीरिक नजदीकी को भी अलग अपराध माना जा सकता है.
इससे पहले अप्रैल 2026 में बांदा आचेह में छह लोगों को अलग-अलग मामलों में सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारने की सजा दी गई थी. इनमें व्यभिचार, पुरुष-महिला के अनुचित मेल-जोल और जुए से जुड़े मामले शामिल थे.
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जनवरी 2026 में भी बांदा आचेह में एक पुरुष और महिला को व्यभिचार और शराब पीने के मामले में कुल 140 कोड़ों की सजा दी गई थी. स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, महिला 140वें कोड़े के बाद बेहोश हो गई थी और मेडिकल टीम ने उसकी मदद की थी.
आचे में ही क्यों लागू है ऐसा कानून?
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन पूरे देश में इस तरह के शरिया आपराधिक नियम लागू नहीं हैं. आचे को विशेष स्वायत्तता मिली हुई है और यहां स्थानीय स्तर पर इस्लामी कानून के आधार पर कई नियम बनाए गए हैं.
इसी वजह से यहां शराब पीने, जुए, व्यभिचार और पुरुष-महिला के कुछ तरह के मेल-जोल को लेकर ऐसे नियम लागू हैं, जिनके उल्लंघन पर सार्वजनिक कोड़े जैसी सजा दी जा सकती है.सार्वजनिक कोड़े मारने की ऐसी सजाओं को लेकर मानवाधिकार संगठनों की ओर से लंबे समय से आलोचना भी होती रही है.
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इस ताजा मामले में महिला और पुरुष ने व्यभिचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 100-100 कोड़ों की सजा पूरी की. महिला के दर्द से जमीन पर गिरने की तस्वीरें अब इस सजा की कठोरता को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
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