Manipur Loktak Lake: भारत अपनी खूबसूरत और अनोखी जगहों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यहां कई ऐसी जगहें हैं, जहां प्रकृति के साथ लोगों का जीवन भी देखने लायक होता है. मणिपुर की लोकटक झील भी ऐसी ही एक खास जगह है. यह सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि झील पर तैरते हुए फुमदी और इनके बीच बसे गांवों की वजह से भी जानी जाती है. यहां कुछ लोग पानी के बीच बने तैरते घरों में रहते हैं और नावों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं. उनकी रोजमर्रा की जिंदगी मछली पकड़ने और झील से मिलने वाले संसाधनों के आसपास ही घूमती है. तो अगर आप भी किसी नई और अनोखी जगह घूमना चाहते हैं तो लोकटक झील के इस तैरते गांव को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
पानी पर तैरते हैं घर
लोकटक झील में फुमदी नाम की तैरती हुई वनस्पतियों और मिट्टी की मोटी परतें पाई जाती हैं. इन्हीं परतों पर घर और दूसरी चीजें बनाई जाती हैं. झील पर बसा चांपू खांगपोक एक प्रसिद्ध तैरता हुआ गांव है. यहां लोग घास-फूस से बनी झोपड़ियों में रहते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में खांगपोक या फुमशांग कहा जाता है.
इन घरों की नींव पानी पर तैरती रहती है. लोग समय-समय पर इसमें नई वनस्पतियां और दूसरी तैरने वाली सामग्री जोड़कर इसे मजबूत करते हैं, ताकि घर पानी पर टिके रहें.
नाव से होता है रोज का सफर
इस तैरते हुए गांव में आने-जाने के लिए लोग लकड़ी की छोटी नावों और स्थानीय नावों का इस्तेमाल करते हैं. एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए भी नाव ही सहारा है. यहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी झील से ही जुड़ी हुई है.
लोग मछली पकड़ने, पानी में उगने वाले पौधों को इकट्ठा करने और झील के पानी का इस्तेमाल करने जैसे कामों पर निर्भर रहते हैं. यही वजह है कि यहां का जीवन बाकी जगहों से काफी अलग और अनोखा नजर आता है.
लोकटक झील जाने के लिए सबसे पहले इंफाल पहुंचना होगा. यहां आप ट्रेन या फ्लाइट से पहुंच सकते हैं. इसके बाद सड़क मार्ग से मोइरांग होते हुए करीब 40 से 50 किलोमीटर का सफर तय करके लोकटक झील पहुंचा जा सकता है.
घूमने का सही समय
लोकटक झील घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय अच्छा माना जाता है. इस दौरान मौसम ठंडा, सूखा और सुहावना रहता है, जिससे झील और आसपास के इलाकों को घूमने में आसानी होती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क