Smartphone की ये 10 Settings अभी बदल लें, नहीं तो आपका डेटा हर दिन लीक होता रहेगा

स्मार्टफोन की सेटिंग्स में थोड़े बदलाव करके आप अपना डेटा लीक पर कंट्रोल कर सकते हैं. एंड्रॉयड हो या आईफोन दोनों में ही आपको सेटिंग्स मिलते हैं जिससे आप अपनी प्राइवेसी को कंट्रोल कर सकते हैं.

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स्मार्टफोन आपकी जासूसी कर सकता है! स्मार्टफोन आपकी जासूसी कर सकता है!

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

आज स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने के लिए नहीं है. इसमें फोटो, बैंकिंग ऐप, चैट, लोकेशन, कॉन्टैक्ट, ईमेल और कई जरूरी जानकारी होती है. लेकिन कई बार हम खुद ही ऐसी सेटिंग्स ऑन छोड़ देते हैं, जिनकी वजह से ऐप्स हमारी जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं.

हर ऐप आपका डेटा चोरी नहीं करता, लेकिन कई ऐप आपकी लोकेशन, कैमरा, माइक्रोफोन या इस्तेमाल की आदतों से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर चीजों पर आपका कंट्रोल होता है. फोन की कुछ सेटिंग्स बदलकर आप अपनी प्राइवेसी काफी हद तक बेहतर कर सकते हैं.

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आइए जानते हैं ऐसी 10 सेटिंग्स, जिन्हें आपको अभी चेक कर लेना चाहिए.

1. सबसे पहले App Permissions देखें

कई ऐप इंस्टॉल करते समय कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट और लोकेशन जैसी परमिशन मांगते हैं. कई लोग बिना पढ़े ही Allow पर टैप कर देते हैं.

अगर किसी टॉर्च या कैलकुलेटर ऐप को कॉन्टैक्ट या माइक्रोफोन की जरूरत ही नहीं है, तो ऐसी परमिशन तुरंत बंद कर दें. कोई भी ऐप जिसे आपको लगता है कि आपकी लोकेशन या दूसरी सेंसिटिव जानकारी नहीं चाहिए तो उसे बंद कर दें.

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Android में Settings > Privacy > Permission Manager या Privacy Dashboard में जाकर देख सकते हैं कि किस ऐप को कौन-कौन सी परमिशन मिली हुई है. गूगल भी सलाह देता है कि सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही ऐप्स को संवेदनशील डेटा की अनुमति दें.

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2. लोकेशन हमेशा ऑन न रखें

कई ऐप ऐसी भी हैं जिन्हें हर समय आपकी लोकेशन जानने की जरूरत नहीं होती.

अगर किसी ऐप को लोकेशन चाहिए भी, तो कोशिश करें कि 'Allow only while using the app' वाला विकल्प चुनें. इससे ऐप बैकग्राउंड में आपकी लोकेशन ट्रैक नहीं कर पाएगी.

Google के मुताबिक Android में आप हर ऐप की लोकेशन परमिशन अलग-अलग कंट्रोल कर सकते हैं.

3. विज्ञापनों के लिए होने वाली ट्रैकिंग बंद करें

आपने देखा होगा कि किसी वेबसाइट पर जूते देखने के बाद वही विज्ञापन दूसरे ऐप्स में भी दिखने लगते हैं. इसकी एक वजह फोन की ऐड प्राइवेसी सेटिंग होती है.

Android में Settings > Google > All Services > Ads के अंदर जाकर Ad Privacy से जुड़े विकल्प बंद किए जा सकते हैं. इससे ऐप्स के बीच विज्ञापन से जुड़ा डेटा शेयर होना कम हो सकता है.

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अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं, तो Settings > Privacy & Security > Tracking में जाकर ऐप्स की Tracking बंद कर सकते हैं. ऐपल के मुताबिक कोई भी ऐप दूसरी वेबसाइट या ऐप पर आपकी गतिविधि ट्रैक करने से पहले अनुमति मांगेगा.

4. माइक्रोफोन और कैमरा ऐक्सेस चेक करें

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क्या हर ऐप को माइक्रोफोन और कैमरा चाहिए? बिल्कुल नहीं.

वीडियो कॉल ऐप को इसकी जरूरत हो सकती है, लेकिन अगर कोई गेम या नोट्स ऐप भी कैमरा और माइक्रोफोन इस्तेमाल कर रहा है, तो आपको उसे दोबारा देखना चाहिए.

Android में Privacy Dashboard यह भी दिखाता है कि पिछले 24 घंटे में किस ऐप ने कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन का इस्तेमाल किया.

5. नियरबाय डिवाइसेज की परमिशन भी देखें

ब्लूटूथ की मदद से कई ऐप आसपास मौजूद डिवाइस को खोज सकती हैं. अगर किसी ऐप को इसकी जरूरत नहीं है, तो यह परमिशन बंद की जा सकती है.

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हाल के सालों में रिसर्चर्स ने भी बताया है कि ब्लूटूथ और Wi-Fi स्कैनिंग का इस्तेमाल कुछ मामलों में लोकेशन से जुड़ी जानकारी का अंदाजा लगाने के लिए किया जा सकता है.

6. जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें हटा दें

कई लोगों के फोन में ऐसे दर्जनों ऐप पड़े रहते हैं जिन्हें महीनों से खोला तक नहीं गया. ऐप हटाने से सिर्फ स्टोरेज खाली नहीं होती, बल्कि उसके जरिए डेटा शेयर होने की संभावना भी कम हो जाती है. एंड्रॉयड कुछ पुराने ऐप्स की परमिशन अपने आप रीसेट भी कर देता है, लेकिन जिन ऐप्स की जरूरत नहीं है, उन्हें हटाना ज्यादा बेहतर है.

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7. Play Store या App Store में डेटा सेफ्टी जरूर पढ़ें

ऐप डाउनलोड करने से पहले लोग सिर्फ रेटिंग देखते हैं. लेकिन प्ले स्टोर में डेटा सेफ्टी सेक्शन भी होता है. यहां बताया जाता है कि ऐप कौन-सा डेटा इकट्ठा करता है और किस मकसद से इस्तेमाल करता है.

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अगर किसी नॉर्मल ऐप को आपकी लोकेशन, कॉन्टैक्ट, फोटो और दूसरी निजी जानकारी चाहिए, तो एक बार जरूर सोचें. गूगल इसी सेक्शन के जरिए यूजर्स को ज्यादा जानकारी देने की बात कहता है.

8. फोन का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें

हर अपडेट सिर्फ नए फीचर नहीं लाता. कई बार कंपनियां ऐसे सुरक्षा अपडेट भी जारी करती हैं जो हैकिंग या डेटा लीक जैसी समस्याओं से बचाने के लिए होते हैं. इसलिए अगर आपके फोन में नया अपडेट आया है, तो उसे लंबे समय तक टालना ठीक नहीं.

9. गूगल अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स भी देखें

अगर आप एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करते हैं, तो सिर्फ फोन की सेटिंग बदलना काफी नहीं है. Google Account में जाकर Location History, Web & App Activity और दूसरी Privacy सेटिंग्स भी चेक करें. अगर किसी फीचर की जरूरत नहीं है, तो उसे बंद किया जा सकता है. इससे आपके अकाउंट से जुड़ा डेटा कंट्रोल करना आसान होता है.

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10. हर परमिशन पर आंख बंद करके 'Allow' न करें

यह सबसे आसान लेकिन सबसे जरूरी सलाह है. कई बार ऐप पहली बार खुलते ही एक के बाद एक कई परमिशन मांगते हैं. जल्दी में लोग सभी को मंजूरी दे देते हैं. याद रखें, अगर कोई ऐप किसी ऐसी चीज की परमिशन मांग रहा है जिसका उसके काम से कोई लेना-देना नहीं है, तो उसे देने की जरूरत नहीं है.

क्या इन सेटिंग्स से आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा?

नहीं. कोई भी सेटिंग 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती. लेकिन इन बदलावों से यह जरूर तय होता है कि आपके फोन से कौन-सी जानकारी किस ऐप तक पहुंच सकती है. जितनी कम गैर-जरूरी परमिशन होंगी, उतना ही आपकी प्राइवेसी पर आपका कंट्रोल रहेगा.

गूगल और ऐपल दोनों ही यूजर्स को समय-समय पर ऐप परमिशन, लोकेशन एक्सेस और ट्रैकिंग सेटिंग्स की समीक्षा करने की सलाह देते हैं.

आज के समय में डेटा भी एक तरह की संपत्ति है. कौन-सा ऐप आपकी कौन-सी जानकारी देख सकता है, इसका फैसला आपके हाथ में है. सिर्फ 10-15 मिनट निकालकर इन सेटिंग्स को एक बार चेक कर लें. हो सकता है कि आपको पता चले कि कोई ऐप ऐसी जानकारी तक पहुंच बना रहा है जिसकी उसे बिल्कुल जरूरत ही नहीं है. यही छोटी-सी सावधानी आपकी डिजिटल प्राइवेसी को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना सकती है.

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