जयपुर: 90 साल के रिटायर्ड जज हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’, गंवा दिए 1.90 करोड़ रुपये, ना करें ये गलती

डिजिटल अरेस्ट का एक हैरान करने वाला केस सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड जज को ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया. इसके बाद उनके साथ 1.90 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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फर्जी पुलिस ने फर्जी केस का झांसा देकर ठगे 1.90 करोड़ रुपये. (Photo: ITG)  फर्जी पुलिस ने फर्जी केस का झांसा देकर ठगे 1.90 करोड़ रुपये. (Photo: ITG) 

विशाल शर्मा

  • जयपुर ,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला केस सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने फर्जी पुलिस कर्मी बनकर एक रिटायर्ड जज को शिकार बनाया है. उनको डिजिटल अरेस्ट रखा और 1.90 करोड़ रुपये ठग लिए. पुलिस कंप्लेंट दर्ज कर चुकी है. 

पुलिस के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिकारी और बैंक मैनेजर बनकर ठगों ने बुजुर्ग पर फर्जी आरोप लगाए गए. रिटायर्ड जज से कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला कारोबार में उनका नाम शामिल है. करीब 1.90 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए. हालांकि बैंक मैनेजर की सूझबूझ से डेढ़ करोड़ रुपये की बड़ी रकम बचाई जा चुकी है. 

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दर्ज रिपोर्ट के अनुसार बीते 28 जुलाई को विक्टिम गणपत सिंह भंडारी के मोबाइल पर एक वीडियो कॉल आया. कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और खुद को पुलिस अधिकारी बताया. 

फर्जी हवाला केस का झांसा देकर डराया 

दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला लेन-देन का खुलासा हुआ है और उसमें भंडारी के भारतीय स्टैट बैंक (RBI) खाते में 40 लाख रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है.यह सुनकर बुजुर्ग घबरा गए. इसके बाद एक के बाद एक कई लोगों ने वॉट्सऐप कॉल कर खुद को आरबीआई अधिकारी और बैंक मैनेजर बताकर संपर्क किया.  ठगों ने जांच और वेरिफिकेशन के नाम पर उनके बैंक खातों और निवेश से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली. 

दबाव में आकर कर दिए कई ट्रांजैक्शन 

ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए बुजुर्ग पर लगातार दबाव बनाया. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनकी रकम को सुरक्षित रखने और जांच में सहयोग के लिए धनराशि को विशेष खातों और म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर करना होगा. डर और दबाव के माहौल में बुजुर्ग ने कई ट्रांजेक्शन किए.  

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अलग-अलग ट्रांजैक्शन में भेजी मोटी रकम 

पुलिस के मुताबिक 3 अगस्त को 22.17 लाख और 28.34 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए. फिर बाद में दो बार 40-40 लाख, फिर 30 लाख और 30 लाख रुपये समेत कई लेन-देन कराए गए. इस तरह ठगी की रकम बढ़ते-बढ़ते करीब 1.90 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. 

यह भी पढ़ें: 'पहचान चोरी' से डिजिटल अरेस्ट तक, सबसे पहले आता है ये मैसेज

परिजनों को ना बताने की सलाह दी  

साइबर ठगों की चालाकी यहीं नहीं रुकी. उन्होंने लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर मानसिक दबाव बनाए रखा. इतना ही नहीं, उन्हें किसी भी परिजन को इस मामले की जानकारी नहीं देने की हिदायत दी गई, ताकि ठगी का राज खुल न सके. 

फिर डेढ़ करोड़ को बनाया निशाना 

10 अगस्त के बाद ठगों की नजर भंडारी के एसबीआई खाते में जमा करीब डेढ़ करोड़ रुपये पर पड़ गई. उन्होंने यह रकम भी ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया. घबराए हुए भंडारी बैंक पहुंचे, लेकिन यहां बैंक मैनेजर की सतर्कता ने पूरा खेल बिगाड़ दिया. बड़े लेन-देन को देखकर मैनेजर को संदेह हुआ. 

बैंक मैनेजर ने बचाए डेढ़ करोड़ रुपये 

बैंक मैनेजर द्वारा पूछताछ के दौरान मामला संदिग्ध लगा तो उन्होंने ट्रांजेक्शन रुकवा दिया और बुजुर्ग को समझाया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं. इसके बाद पूरा मामला सामने आया और पुलिस में शिकायत दर्ज की. फिलहाल ज्योति नगर थाना पुलिस ट्रांजेक्शन और बैंक खातों के आधार पर साइबर ठगों की पहचान करने में जुटी है.  

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डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? 

साइबर ठग अक्सर भोले-भाले लोगों को शिकार बनाते हैं. इसके बाद वे वर्चुअली वीडियो कॉल या वॉयस कॉल पर लगातार कनेक्ट रहने को कहते हैं. इसमें वे विक्टिम को डराते हैं, धमकाते हैं और गिरफ्तार करने तक की धमकी दे देते हैं. इस दौरान जांच के नाम पर परिवार, बैंक खाते, आधार कार्ड की डिटेल्स तक हासिल कर लेते हैं. फिर वे केस से बचाने के नाम, जांच के नाम पर या फिर बैंक का OTP आदि मांग लेते  हैं. इसके बाद वे बैंख खाता खाली कर देते हैं. 

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें? 

डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए जरूरी है कि अनजान नंबर से आने वाले किसी भी कॉल, वीडियो कॉल पर यकीन ना करें. अगर कोई खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताता है तो उसकी पहचान एक बार वेरिफाई करें. 

अगर कोई शख्स पुलिस की वर्दी पहनकर आपको डिजिटल अरेस्ट करने को कहता है तो तुरंत इसकी जानकारी नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें. पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती है. 

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