27 April 2025
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डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के नए-नए केस सामने आ रहे हैं. हाल ही में पुणे के पत्नी और पति को डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 12 लाख ठगने वाले थे.
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अब सवाल आता है कि आखिर डिजिटल अरेस्ट से पहले साइबर ठग कैसे लोगों को शिकार बना रहे हैं. इसके लिए साइबर डेटा की मदद से पर्सनल डिटेल्स आदि निकालते है. इसे ही पहचान चोरी करते हैं.
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फिर साइबर ठग अनजान नंबर का यूज करते हैं. इसके बाद अनजान नंबर से कॉल करके शख्स को बताया जाता है कि उनकी आईडी, आधार या अन्य झांसा देकर शिकार बनाया जाता है. इसको पहचान चोरी कहते हैं.
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विक्टिम को पार्सल, मनी लॉन्ड्रिंग आदि का हवाला दिया जाता है, जिसके बाद विक्टिम को गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है. विक्टिम से कहा जाता है कि उनके खिलाफ केस दर्ज है.
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इसके बाद विक्टिम को ऑनलाइन जांच में सहयोग करने को कहते हैं. फिर विक्टिम को एक कमरे में अकेले रहने का सलाह दी जाती है और फिर कैमरा ऑन करने को कहते हैं.
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इसके बाद विक्टिम को चेतावनी दी जाती है कि उस केस में कई बड़े-बड़े लोगों के नाम शामिल हैं. इसके बाद इस केस के सीक्रेट बनाए रखने की सलाह देते हैं.
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साइबर ठगों के द्वारा विक्टिम कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया जाता है. फिर विक्टिम से परिवार की डिटेल्स, इनवेस्टमेंट आदि में पूछते हैं.
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फिर विक्टिम से जांच के नाम पर सभी रकम एक दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहते हैं. विक्टिम से वादा किया जाता है कि जांच में निर्दोष होने पर पूरी रकम मिल जाएगी.
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विक्टिम द्वारा एक बार रकम ट्रांसफर होने के बाद कॉन्टैक्ट नंबर बंद कर दिया जाता है. फिर विक्टिम को समझ आता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है. सावधानी के लिए जरूरी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल पर पूछताछ नहीं करती है.
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