'वर्ल्ड कप कोई र‍िहर्सल नहीं है...', पीजे श्रीजेश का फूटा गुस्सा, भारतीय हॉकी मैनेजमेंट को सुनाई खरी-खरी

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के वर्ल्ड कप से सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने के बाद पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने हॉकी मैनेजमेंट पर तीखा हमला बोला है. पुरुष टीम अर्जेंटीना से 3-5 से हारी और महिला टीम ऑस्ट्रेल‍िया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद बाहर हुई. श्रीजेश ने कोचिंग, तैयारी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए.

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श्रीजेश ने भारतीय हॉकी मैनेजमेंट को सुनाई खरी-खरी (Photo: PTI) श्रीजेश ने भारतीय हॉकी मैनेजमेंट को सुनाई खरी-खरी (Photo: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों का वर्ल्ड कप  में सेमीफाइनल खेलने का सपना टूट चुका है. इसके बाद भारतीय हॉकी के पूर्व दिग्गज गोलकीपर और दो बार के ओलंप‍िक ब्रॉन्ज मेडल‍िस्ट पीआर श्रीजेश ने हॉकी मैनेजमेंट और टीम के पूरे सिस्टम पर बेहद तीखा हमला बोला है. श्रीजेश ने सवाल उठाया कि आखिर वर्ल्ड कप में नाकामी के बाद जवाबदेही किसकी तय होगी?

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भारत की पुरुष टीम सोमवार को नीदरलैंड्स के एमेस्टलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेड‍ियम में अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 से हार गई. इस हार के साथ भारत का सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया. अब भारतीय टीम सातवें स्थान के लिए बेल्ज‍ियम  से भिड़ेगी.

महिला टीम भी रविवार को ऑस्ट्रेल‍िया के खिलाफ अपने आखिरी दूसरे राउंड के मुकाबले में 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो गई. दोनों टीमों के बाहर होने के बाद श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबी पोस्ट लिखकर कई असहज सवाल खड़े कर दिए.

एक्स पर फूटा श्रीजेश का गुस्सा 
टीमों के बाहर होने के बाद श्रीजेश ने X पर लिखा- चिंता मत कीजिए... वर्ल्ड कप कोई मायने नहीं रखता. एश‍ियन गेम्स आने वाले हैं. वहां एक मेडल जीत लीजिए और फिर LA 2028 के सपने देखना शुरू कर दीजिए. शायद वर्ल्ड कप में जो कुछ गलत हुआ, उसे ढकने के लिए इतना ही काफी है. 

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श्रीजेश ने खासतौर पर महिला टीम की तैयारियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले महिला टीम के चीफ कोच छुट्टी पर थे. इसके बावजूद खिलाड़ियों ने दिल लगाकर संघर्ष किया और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया.

उन्होंने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए पूछा कि आखिर जवाबदेही किसकी है? क्या कोई टीम अपनी तैयारियों के आखिरी दौर में चीफ कोच के दूर रहने के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती है?

'सीखने का अनुभव' कब तक चलेगा?
श्रीजेश ने पुरुष टीम के प्रदर्शन को लेकर भी सीधा सवाल किया. उन्होंने लिखा कि जब टीम किसी बड़ी टीम से हारती है तो उसे ' लर्न‍िंग एक्सपीर‍ियंस' यानी सीखने का अनुभव बता दिया जाता है. किसी एश‍ियन टीम को हरा दे तो उसे बड़ी जीत कह दिया जाता है. अच्छा खेल दिखाए तो कहा जाता है कि टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन श्रीजेश का सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर भारतीय हॉकी किस दिशा में जा रही है?

उन्होंने पूछा- क्या हम ऐसी टीम बना रहे हैं जो सिर्फ अच्छा हॉकी खेले, या ऐसी टीम तैयार कर रहे हैं जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ जीत सके?  पूर्व भारतीय गोलकीपर ने साफ कहा कि 'लर्न‍िंग', ' गुड हॉकी' और आने वाले tournaments के पीछे छिपना बंद करना होगा. उनके मुताबिक वर्ल्ड कप कोई अभ्यास या र‍िहर्सल नहीं है.  श्रीजेश ने अपनी पोस्ट के फाइनल में भारतीय हॉकी के सिस्टम से सबसे मुश्किल सवाल पूछे. उन्होंने लिखा कि फाइनल कौन मुश्किल सवाल पूछेगा? कौन जवाबदेही तय करने की मांग करेगा?

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और फिर उन्होंने सबसे बड़ा सवाल उठाया- क्या किसी को सच में इसकी परवाह भी है?

श्रीजेश का यह हमला ऐसे समय आया है, जब वह खुद भारतीय हॉकी के कोचिंग सिस्टम को लेकर पहले भी सवाल उठा चुके हैं. उनका जूनियर पुरुष टीम के कोच के रूप में टर्म आगे नहीं बढ़ाया गया था. श्रीजेश ने पिछले साल जूनियर वर्ल्ड कप में भारतीय जूनियर पुरुष टीम को ब्रॉन्ज़ मेडल दिलाया था. इसके बावजूद उनका टर्म रिन्यू नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने भारतीय कोचिंग की क्वालिटी और सिस्टम को लेकर सवाल उठाए थे.

महिला टीम भी गोल के अंतर से बाहर
भारत की महिला टीम के लिए भी वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल का रास्ता काफी करीब जाकर बंद हुआ. रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे राउंड के अपने आखिरी मुकाबले में भारतीय टीम 0-0 से ड्रॉ खेली. इस नतीजे के बाद ऑस्ट्रेलिया गोलों की संख्या के आधार पर सेमीफाइनल में पहुंच गई और भारत बाहर हो गया. अब पुरुष और महिला, दोनों भारतीय टीमों के सेमीफाइनल की रेस से बाहर होने के बाद पी. आर. श्रीजेश की टिप्पणी ने भारतीय हॉकी मैनेजमेंट, कोचिंग और टीम की तैयारी को लेकर बहस और तेज कर दी है.

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि भारत वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में क्यों नहीं पहुंचा. श्रीजेश ने जिस तरह से सवाल उठाए हैं, उससे असली मुद्दा अब यह बन गया है कि भारतीय हॉकी क्या सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करने से निपटता है, या फिर दुनिया की सबसे मजबूत टीमों को लगातार हराने वाला सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है.

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