भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बल्लेबाज पूनम राउत ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी. 2009 में भारत के लिए डेब्यू करने वाली पूनम ने एक दशक से ज्यादा लंबे करियर के दौरान तीनों फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व किया. 37 साल की पूनम ने अपना आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला जून 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था.
पूनम राउत को खास पहचान 2017 महिला वर्ल्ड कप में उनके प्रदर्शन से मिली. इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में उन्होंने 86 रन बनाए थे. हालांकि, भारतीय टीम खिताब से महज नौ रन दूर रह गई. उसी टूर्नामेंट में उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ शतक जड़ा और दीप्ति शर्मा के साथ पहले विकेट के लिए 320 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की. पूनम ने उस प्रतियोगिता में कुल 381 रन बनाए थे.
पूनम का शानदार रहा इंटरनेशनल करियर
पूनम राउत ने भारतीय महिला टीम के लिए 73 ओडीआई मैचों में 34.83 के एवरेज से 2299 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से तीन शतक और 15 अर्धशतक निकले. टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 35 मैच खेलकर 719 रन (एवरेज 27.65) बनाए, जिसमें चार अर्धशतक शामिल रहे. पूनम के नाम पर चार टेस्ट मैचों में 44.00 के एवरेज से 264 रन दर्ज हैं. टेस्ट क्रिकेट में उनका एकमात्र शतक 2014 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ आया था.
अपने रिटायरमेंट संदेश में पूनम राउत ने मुंबई की गलियों से भारतीय टीम तक के सफर को याद किया. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सिर्फ सपना पूरा होना नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी. उन्होंने अपने करियर में साथ देने वाले लोगों का आभार जताया.
पूनम राउत ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें करियर से कहीं ज्यादा पहचान, उद्देश्य और एक परिवार दिया. पूनम ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई के बाद खेल के प्रति उनका लगाव कम नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अब उनकी अगली इनिंग्स उस खेल को कुछ लौटाने की होगी, जिसने उन्हें पहचान, उद्देश्य और एक परिवार दिया.
पूनम राउत की पहचान सिर्फ उनके रनों तक सीमित नहीं रही. 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के ऐतिहासिक पिंक-बॉल टेस्ट में उन्होंने खेल भावना की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी खूब चर्चा हुई थी. उस मैच के दौरान पहली पारी में 36 रन बनाने वाली पूनम ने गेंद का किनारा लगने के बाद खुद ही मैदान छोड़ दिया, जबकि अंपायर ने उन्हें नॉटआउट दिया था. उनका यह फैसला क्रिकेट में ईमानदारी और खेल भावना के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क