पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि साल 2000 में उन्हें बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) से बाहर कर दिया गया था, लेकिन उनका मानना है कि उस घटना में उनकी कोई गलती नहीं थी. NCA को अब BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के CoE (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) नाम से जाना जाता है.
एक इंटरव्यू में हरभजन ने कहा कि NCA में खिलाड़ियों के लिए एक डाइट चार्ट बनाया गया था, लेकिन उन्हें जो खाना दिया जा रहा था, वह उस डाइट प्लान के अनुसार नहीं था. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों ने इस मुद्दे पर कई बार शिकायत की, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी.
हरभजन ने क्रिकेटनेक्सटऑफिशियल से बातचीत में कहा, 'हमें एक डाइट चार्ट दिया गया था, लेकिन खाने में कुछ और ही मिलता था. हमने कई बार कहा कि जो चार्ट में लिखा है, वही खाना मिलना चाहिए. जब बार-बार शिकायत के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ, तो एक दिन मैंने गुस्से में डाइट चार्ट फाड़ दिया.'
यह भी पढ़ें: क्या यह भी राजस्थान की तस्वीर है? हरभजन सिंह का AAP पर पलटवार, बोले- नशे का मुद्दा छिपाया नहीं जाएगा
उनके इस कदम के बाद NCA ने कार्रवाई करते हुए उन्हें अकादमी से बाहर कर दिया. हरभजन का कहना है कि उन्होंने यह कदम सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के लिए उठाया था.
उन्होंने आगे कहा, 'मेरी गलती नहीं थी. मैं खिलाड़ियों के हक की बात कर रहा था. अगर किसी व्यवस्था में कमी है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना गलत नहीं होना चाहिए.'
यह भी पढ़ें: IPL क्रिकेटर अभिषेक पोरेल गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर रेप का लगा आरोप, रिकॉर्ड किए प्राइवेट मोमेंट्स
हरभजन ने यह भी संकेत दिया कि उस समय कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्हें सवाल पूछने वाले खिलाड़ी पसंद नहीं आते थे. उनके मुताबिक, विरोध करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया था.
हालांकि, NCA से निकाले जाने के बावजूद हरभजन ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और बाद में भारतीय टीम में वापसी की. इसके बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 400 से अधिक विकेट लिए और टीम इंडिया के सबसे सफल ऑफ स्पिनरों में अपनी जगह बनाई.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क