जापान में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. इस ऐतिहासिक जीत का जश्न पूरे देश में मन रहा है, लेकिन ग्वालियर में खुशी कुछ खास है. वजह है ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी, जो गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनीं. इशिका की जीत पर उनके घर में जमकर जश्न मना, मिठाइयां बांटी गईं और आतिशबाजी की गई. अब परिवार का सपना है कि इशिका का अगला पड़ाव ओलंपिक हो.
महज 11 साल की उम्र में हॉकी स्टिक थामने वाली इशिका चौधरी ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर आज ग्वालियर से लेकर पूरे देश तक अपनी पहचान बनाई है. एशियन गेम्स में चीन के खिलाफ भारतीय महिला हॉकी टीम की 1-0 की जीत के साथ इशिका के घर में खुशी का माहौल है. परिवार ने मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी और जीत का जश्न मनाया.
इशिका की मां गायत्री चौधरी कहती हैं कि परिवार की खुशी सिर्फ गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है. अब इशिका के सामने अगला लक्ष्य ओलंपिक है. परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया, उसी तरह आने वाले समय में ओलंपिक में भी देश के लिए शानदार प्रदर्शन करेंगी.
'बदल रही है ग्वालियर-चंबल में बेटियों को लेकर सोच'
स्थानीय हॉकी कोच अविनाश भटनागर ने बताया कि ग्वालियर-चंबल में बेटियों को लेकर सोच अब बदल रही है. कभी बेटियों की शादी को ही प्राथमिकता माना जाता था, लेकिन आज परिवार बेटियों को पढ़ा रहे हैं, उन्हें खेल के मैदान में आगे बढ़ा रहे हैं. इशिका की कहानी इसी बदलती सोच की मिसाल है.
बचपन में घरवाले कहते थे 'कछुआ'
इशिका की कामयाबी के बीच परिवार की एक मजेदार कहानी भी है. इशिका की मौसी गिरिजा तिवारी बताती हैं कि बचपन में घर में सभी उन्हें प्यार से 'कछुआ' कहते थे. लेकिन आज यही कछुआ अपनी मेहनत से रेस जीत चुका है और भारत के लिए गोल्ड लेकर आया है. देखें VIDEO:-
अब अगला पड़ाव और सपना- ओलंपिक
ग्वालियर की इस बेटी ने एशियन गेम्स के गोल्ड के साथ अपने परिवार को जश्न का मौका दिया है. घर से लेकर हॉकी मैदान तक इशिका की इस उपलब्धि की चर्चा है. अब परिवार की जुबां पर एक ही सपना है कि एशियन गेम्स का गोल्ड जीत चुकी इशिका का अगला मिशन ओलंपिक हो.
सर्वेश पुरोहित