गुजरात में 22 वर्षीय युवक के अंगदान के बाद पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष स्टॉपेज देकर धड़कता दिल अहमदाबाद पहुंचाया गया. मां के साहसिक फैसले से कई मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी. परिजनों का कहना है कि शरीर नश्वर है, लेकिन अगर किसी के अंग किसी और को जीवन दे सकें, तो इससे बड़ा पुण्य नहीं हो सकता.