मोहन भागवत ने ब्रिटेन में रह रहे हिंदुओं से अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार और जिम्मेदार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत से जुड़ाव और ब्रिटेन के प्रति निष्ठा में कोई विरोधाभास नहीं है। सेवा को उन्होंने सौभाग्य बताया और युवाओं को उद्देश्य, अनुभव व स्वतंत्रता देकर अपना रास्ता चुनने का अवसर देने पर जोर दिया।