पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ खान-पान के नियमों का भी विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक परंपराओं में श्राद्धकर्ता के लिए सात्विक, ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता में रखा जाता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं कि पितृ पक्ष के पूरे 16 दिनों में हर व्यक्ति के लिए दूसरे के घर का भोजन करना अनिवार्य रूप से वर्जित है. अलग-अलग ग्रंथों और पारिवारिक परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं.