गंगा नदी बेसिन ने 1300 साल में सबसे अधिक सूखा देखा... भयावह स्थिति

भारत में सूखे की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. गंगा के मैदान और उत्तर-पूर्व भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. 1971-2020 के अध्ययन में पता चला कि यहां नमी बहुत तेज कम हुई है. कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान ने स्थिति और खराब कर दी है. गंगा घाटी ने 1991-2020 में 1300 साल का सबसे तेज सूखा देखा है.

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ये है प्रयागराज संगम की तस्वीर. इसमें आपको गंगा का जलस्तर काफी कम दिखेगा. (File Photo: Getty) ये है प्रयागराज संगम की तस्वीर. इसमें आपको गंगा का जलस्तर काफी कम दिखेगा. (File Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

भारत में सूखे की समस्या अब बहुत गंभीर हो गई है. गंगा के मैदानी इलाके के कुछ हिस्से 2009 से ही सूखे के बड़े हॉटस्पॉट बन चुके हैं. दिसंबर 2025 में जारी एक अध्ययन ने 1971 से 2020 तक छह बड़े क्षेत्रों – पश्चिमी और मध्य भारत, हिमालय, गंगा के मैदान, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पूर्व भारत में सूखा बढ़ा है.  

DTE की रिपोर्ट के मुताबिक स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इवैपोट्रांसपिरेशन इंडेक्स जैसे साधारण मौसम सूचक का इस्तेमाल किया गया. नतीजा चौंकाने वाला है – गंगा के मैदान, हिमालय और उत्तर-पूर्व भारत में सूखे की रफ्तार बहुत तेज बढ़ रही है. कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान ने इस समस्या को और गहरा कर दिया है.

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क्यों हो रहा है इतना सूखा?

मानसून के समय बारिश कम हो रही है, जबकि गर्मी के मौसम में भाप बनने की रफ्तार बढ़ गई है. दिन और रात दोनों समय तापमान बढ़ रहा है. भूजल का ज्यादा दोहन और खेतों में ज्यादा पानी वाली फसलें लगाने से पानी की कमी और तेज हो रही है. उत्तर-पूर्व भारत में पहले बहुत बारिश होती थी, लेकिन अब वहां भी कमजोर मानसून और गर्मी ने पानी की समस्या पैदा कर दी है.

सितंबर 2025 में जारी एक और अध्ययन ने दिखाया कि गंगा नदी घाटी ने 1991-2020 के बीच पिछले 1300 सालों का सबसे तेज सूखा देखा. पेड़ों की छल्लों से पता चला कि यह सूखा 16वीं सदी के सूखों से भी 76% ज्यादा तीव्र था. यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक कहते हैं कि यह सूखा सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि इंसानी गतिविधियों का नतीजा है.

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पानी का दिवालियापन

सूखा अब सिर्फ पानी की समस्या नहीं रह गया. यह पानी का दिवालियापन कहलाता है. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट कहती है कि पानी अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है. अगर सही प्रबंधन नहीं हुआ तो देशों के बीच भी पानी पर लड़ाई हो सकती है. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पानी का संकट तब तक रहेगा जब तक पृथ्वी पर इंसान और दूसरे जीव हैं.

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समाधान क्या हैं?

वैज्ञानिक कहते हैं कि सिर्फ नई तकनीक काफी नहीं. ड्रिप इरिगेशन, सौर पंप, पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल और खारे पानी से नमक हटाने वाले प्लांट मदद कर सकते हैं. लेकिन हर उपाय के साथ खतरा भी जुड़ा है. ज्यादा पानी वाली फसलें लगाने से भूजल और तेज खत्म हो सकता है. 

इजरायल और कैलिफोर्निया के उदाहरण से सीख सकते हैं. दोनों ने सूखे के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को पानी पर कम निर्भर बनाया. इजरायल ने खेती के अलावा सर्विस और उद्योग क्षेत्र को मजबूत किया. कैलिफोर्निया में 2014 के सूखे में भी अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित नहीं हुई क्योंकि कृषि का हिस्सा कम था.

क्या करना चाहिए?

भारत में कृषि में 85% पानी इस्तेमाल होता है. इसलिए सबसे पहले खेती के तरीके बदलने चाहिए. बिजली सब्सिडी में सुधार करके भूजल का अंधाधुंध निकालना रोकना जरूरी है. सीधी बुवाई, मिट्टी में नमी बचाने की तकनीक और जल प्रबंधन को आम बनाना होगा. 

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प्राचीन प्रणालियां भी मदद कर सकती हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना पड़ेगा. वैज्ञानिक कहते हैं कि डेटा की बहुत कमी है. ज्यादा कुओं में नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है.   

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