हंतावायरस पुरुषों के स्पर्म में 6 साल तक रह सकता है, रिकवरी के बाद भी बीमारी का खतरा

हंतावायरस पुरुषों के स्पर्म में 6 साल (71 महीने) तक जीवित रह सकता है. स्विट्जरलैंड की स्टडी में पाया गया कि ठीक हो चुके व्यक्ति में भी वायरस टेस्टिस में छिपा रहता है. यौन संबंध से इसके फैलने का खतरा रहता है.

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हंतावायरस पुरुषों के अंडकोष में जाकर छिप जाता है. यौन संबंध बनाने पर फैलने का खतरा रहता है. (Photo: Getty) हंतावायरस पुरुषों के अंडकोष में जाकर छिप जाता है. यौन संबंध बनाने पर फैलने का खतरा रहता है. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

अब एक नई रिसर्च ने हैरान करने वाली बात सामने लाई है. हंतावायरस संक्रमण के बाद भी यह पुरुषों के स्पर्म में छह साल तक जिंदा रह सकता है. इससे यौन संबंध के जरिए दूसरों में फैलने का खतरा हो सकता है, भले ही व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो चुका हो. यह खोज उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो इस वायरस से संक्रमित हुए हैं. 

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स्विट्जरलैंड के स्पीज लेबोरेटरी ने यह रिसर्च की, जो न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल खतरों से निपटने वाली सरकारी संस्था है. वैज्ञानिकों ने 55 साल के स्विस पुरुष का परीक्षण किया, जो 6 साल पहले दक्षिण अमेरिका में हंतावायरस के एंडीज स्ट्रेन से संक्रमित हुआ था.

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उसके खून, मूत्र और सांस की नली में वायरस का कोई निशान नहीं बचा था, लेकिन उसके स्पर्म में 71 महीने (लगभग 6 साल) बाद भी वायरस मौजूद था. वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों के टेस्टिस (अंडकोष) वायरस के लिए एक सुरक्षित जगह बन जाते हैं. यहां इम्यून सिस्टम आसानी से पहुंच नहीं पाता, क्योंकि स्पर्म सेल्स को प्रजनन के लिए सुरक्षा दी जाती है. इसी वजह से वायरस वहां छिपकर सालों तक जीवित रह सकता है.

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इबोला और जिका वायरस जैसी समस्या

यह नई खोज इबोला और जीका वायरस की तरह है. इन वायरसों के बारे में पहले भी पता चला था कि वे टेस्टिस में छिप सकते हैं. 2021 में गिनी में इबोला का एक छोटा आउटब्रेक हुआ था, जो 2014-2016 के बड़े महामारी से बचे एक व्यक्ति से यौन संबंध के जरिए फैला. उस व्यक्ति में भी वायरस सालों तक स्पर्म में रहा.

हंतावायरस के मामले में अब तक सेक्शुअल ट्रांसमिशन का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है. लेकिन अध्ययन कहता है कि एंडीज वायरस में यह संभावना है. इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है.

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क्रूज शिप के मामलों पर क्या असर?

हाल ही में MV होंडियस क्रूज शिप से जुड़े आठ पुष्ट हंतावायरस केस और ब्रिटेन में 20 बिना लक्षण वाले लोगों की खबर आई है. इस स्टडी के बाद इन मामलों पर नजर रखना और भी जरूरी हो गया है. पुरुष मरीजों को 42 दिन के क्वारंटाइन के अलावा लंबे समय तक सुरक्षित यौन संबंध की सलाह दी जाए.

WHO की इबोला गाइडलाइंस की तरह सावधानी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इबोला से ठीक हुए पुरुषों के लिए सख्त प्रोटोकॉल रखता है. उनके स्पर्म की हर तीन महीने में जांच होती है. दो लगातार नेगेटिव रिपोर्ट आने तक उन्हें सभी प्रकार के यौन संबंध से परहेज करना चाहिए या हर बार कंडोम का सही इस्तेमाल करना चाहिए. 

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वैज्ञानिकों का मानना है कि कम से कम 27 संक्रामक बीमारियां टेस्टिस को सुरक्षित ठिकाना बना सकती हैं. इसलिए हंतावायरस वाले मरीजों को भी इसी तरह की गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए, खासकर जब तक डॉक्टर पूरी तरह क्लियर न कर दें.

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ब्रिटेन की UK Health Security Agency (UKHSA) ने कहा है कि वे सभी नई रिसर्च पर नजर रख रहे हैं. संक्रमित या संपर्क में आए लोगों को आगे संक्रमण रोकने की पूरी सलाह दी जाएगी. इसमें यौन संबंध से जुड़ी सावधानियां भी शामिल होंगी.

क्यों होता है ऐसा? टेस्टिस की खासियत

पुरुषों के अंडकोष में स्पर्म बनते हैं. इम्यून सिस्टम इन स्पर्म सेल्स पर हमला नहीं करता, वरना प्रजनन रुक जाएगा. यही सुरक्षा वायरस को भी फायदा पहुंचाती है. वायरस यहां छिपकर इम्यून सिस्टम से बच जाता है. सालों तक एक्टिव रह सकता है. जब व्यक्ति यौन संबंध बनाता है तो वायरस पार्टनर तक पहुंच सकता है.

क्या करें मरीज और परिवार?

  • संक्रमण के बाद लंबे समय तक डॉक्टर की सलाह मानें.
  • सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं या कंडोम का इस्तेमाल करें.
  • हाथ धोना, साफ-सफाई और सावधानी बरतें.
  • परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करें. 
  • स्पर्म की जांच नियमित करवाएं.

यह खोज चिकित्सा जगत के लिए नया सबक है. हंतावायरस अब केवल चूहों या हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं रह गया. यौन संबंध के जरिए भी इसका खतरा हो सकता है. इसलिए डॉक्टरों, स्वास्थ्य विभागों और आम लोगों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. भविष्य में और ज्यादा रिसर्च से इसकी पुष्टि और बेहतर रोकथाम के तरीके सामने आएंगे. फिलहाल, सावधानी ही सबसे अच्छा बचाव है.

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