बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, आंध्र-ओडिशा तट पर भारी बारिश का खतरा

बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट के करीब पहुंच रहा है. 23-24 सितंबर के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और जलभराव का अलर्ट जारी किया गया है. तटीय इलाकों में लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है.

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आप देख सकते हैं कि बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन वाला इलाका बना है. (Photo: IMD) आप देख सकते हैं कि बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन वाला इलाका बना है. (Photo: IMD)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST

बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब डीप डिप्रेशन में बदल चुका है. आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटीय क्षेत्रों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. 22 सितंबर को यह सिस्टम विशाखापट्टनम से लगभग 320 किलोमीटर पूर्व में स्थित था. यह पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में करीब 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. 

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मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम और तीव्र हो सकता है. 23 सितंबर देर रात से 24 सितंबर सुबह के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों को पार कर सकता है. संभावित क्रॉसिंग क्षेत्र विशाखापट्टनम से गोपालपुर के बीच है. इससे तटीय जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की आशंका है.

यह सिस्टम मॉनसून के अंतिम चरण में सक्रिय हुआ है. बंगाल की खाड़ी में इस समय नमी और तापमान की स्थितियां अनुकूल हैं, जिससे यह और मजबूत हो सकता है. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है.

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स्थानीय प्रशासन ने जलभराव, तेज हवाओं और समुद्री लहरों के खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी किया है. निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों को अपडेट्स पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है.

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आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश की संभावना

तटीय आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और श्रीकाकुलम जैसे जिलों में भारी से ज्यादा भारी बारिश हो सकती है. दक्षिण ओडिशा के गंजाम और पुरी क्षेत्रों में भी यही स्थिति रहने वाली है. बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं जो पेड़ों को उखाड़ने या बिजली के खंभों को गिरा सकती हैं. 

समुद्र में तेज लहरें उठेंगी इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई है. जलभराव की समस्या शहरों और गांवों दोनों में पैदा हो सकती है. सड़कें बंद होने या यातायात बाधित होने की आशंका है. प्रशासन ने राहत शिविर तैयार रखने और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं.

बारिश की तीव्रता सिस्टम के क्रॉसिंग के समय सबसे अधिक रह सकती है. 23 सितंबर की रात और 24 सितंबर की सुबह सबसे संवेदनशील समय है. इन क्षेत्रों में पहले से ही नदियों का जल स्तर सामान्य से ऊपर जा सकता है. किसानों को फसलों की सुरक्षा के उपाय करने की सलाह दी जा रही है. घरों की छतें और कमजोर संरचनाओं की जांच कर लेनी चाहिए.

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तेलंगाना पर भी पड़ेगा असर

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सिस्टम के तट पार करने के बाद उसका प्रभाव आंतरिक क्षेत्रों तक पहुंचेगा. तेलंगाना में 24 सितंबर सुबह से 25 सितंबर रात तक चरम प्रभाव रहने की संभावना है. पूर्वी जिलों में 200 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है. यह मात्रा सामान्य से काफी अधिक है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है. 

हैदराबाद सहित कई शहरों में जलभराव का खतरा बढ़ जाएगा. कृषि क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से नुकसान हो सकता है. मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है और लोगों को आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने को कह रहा है.

तेलंगाना में पहले से ही मॉनसून की बारिश हो चुकी है इसलिए अतिरिक्त पानी से नदियों और जलाशयों पर दबाव बढ़ेगा. स्थानीय प्रशासन ने ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की है. स्कूल और ऑफिस प्रभावित हो सकते हैं इसलिए समय से पहले योजना बनाना जरूरी है.

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सतर्कता और तैयारी की जरूरत

इस तरह के मौसमी सिस्टम से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं. तटीय राज्यों के आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय हैं. रेड क्रॉस और अन्य राहत एजेंसियां भी तैयारियों में जुटी हैं. आम नागरिकों को मौसम विभाग की वेबसाइट या ऐप पर नियमित अपडेट चेक करने चाहिए. बिजली के उपकरणों को सुरक्षित रखना, पानी जमा न होने देना और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना महत्वपूर्ण है.

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समुद्री तटों पर न जाना और ऊंचे स्थानों पर रहना बेहतर होगा. डीप डिप्रेशन के प्रभाव से कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर रह सकता है. बारिश रुकने के बाद भी जलभराव और सड़कों की स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है. सरकार और स्थानीय निकाय मिलकर नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. समय रहते सतर्कता बरतने से जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.  

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