कोलंबिया के पश्चिमी शहर पेरिरा में भूकंप के 36 घंटे बाद एक महिला को मलबे के नीचे से जिंदा निकाला गया. डेनिएला लार्गो सांचेज नाम की 32 वर्षीय महिला मंगलवार रात को बचाई गई. भूकंप ने पेरिरा समेत कई शहरों में भारी तबाही मचाई थी. डेनिएला एक गिरे हुए होटल के मलबे के नीचे फंसी हुई थीं.
बोमबेरोस बोगोटा यानी बोगोटा अग्निशमन विभाग ने इस बचाव की पुष्टि की. उनके अनुसार यह संयुक्त अभियान था जिसमें पेरिरा अग्निशमन विभाग और विशेष आपात एवं आपदा संचालन इकाई पोनल्सार ने मिलकर काम किया. लंबे समय तक मलबे में दबे रहने के बावजूद महिला जिंदा मिलीं. उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में चिकित्सा देखभाल के लिए भेजा गया.
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बचाव दल और स्वयंसेवक पूरे दिन से उस क्षेत्र में मेहनत कर रहे थे जहां डेनिएला फंसी हुई थीं. मंगलवार दोपहर करीब एक बजे के आसपास उनकी मौजूदगी का पता चला. उसके बाद लगभग दस घंटे तक लगातार खुदाई चली. बचावकर्ताओं को चार परतों वाले कंक्रीट को हटाना पड़ा. दो अलग-अलग खुदाई करनी पड़ी. वे नीचे से सुरंग बनाकर महिला तक पहुंचे ताकि ऊपर की संरचना और न गिरे.
इस दौरान उन्हें ऑक्सीजन मास्क और सिलेंडर के जरिए सांस लेने में मदद दी गई. पूरे ऑपरेशन में बहुत सावधानी बरती गई क्योंकि मलबा अस्थिर था. आफ्टरशॉक का खतरा बना हुआ था. जब डेनिएला को नीले कंबल में लपेटकर बाहर निकाला गया तो मौके पर मौजूद परिवार, स्वयंसेवक और बचावकर्मी खुशी से चिल्लाने लगे.
उनकी मां सैंड्रा मिलेना पेरेज ने बताया कि उन्होंने उम्मीद लगभग खो दी थी लेकिन एक स्थानीय व्यक्ति ने मलबे के नीचे से आवाज सुनी और मदद शुरू की. उसी की वजह से पेशेवर टीम पहुंच पाई. घर पर डेनिएला का 12 वर्षीय बेटा उनका इंतजार कर रहा था.
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राष्ट्रपति का बयान
कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला ने एक्स पर एक संदेश साझा किया जिसमें गृह मंत्री रोड्रिगो लारा का बयान शामिल था. मंत्री ने बताया कि महिला को गिराए गए होटल के नीचे से निकाला गया. वे अस्पताल में इलाज करा रही हैं. राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि पेरिरा में अभी भी 40 से ज्यादा लोगों की तलाश जारी है.
यह बचाव उस समय हुआ जब देश भर में मौतों की संख्या 240 से ऊपर पहुंच चुकी थी. सैकड़ों लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते थे. सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति घोषित कर रखी है. सभी संसाधन बचाव कार्यों में लगाए जा रहे हैं.
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की जान बचाने की नहीं है बल्कि पूरे बचाव अभियान की हिम्मत और कुशलता को दिखाती है. भूकंप के बाद पहले 24 से 48 घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि उस दौरान जीवित बचे लोगों को निकालने की संभावना ज्यादा होती है.
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36 घंटे बाद भी सफल बचाव इस बात का प्रमाण है कि टीमों ने हार नहीं मानी. पेरिरा में कई इमारतें पूरी तरह ढह गई थीं. कॉफी उत्पादक क्षेत्र का यह शहर भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ था. बोगोटा से आई यूएसएआर टीम यानी शहरी खोज और बचाव दल ने स्थानीय टीमों के साथ मिलकर काम किया. इस तरह के संयुक्त प्रयासों से ही और लोगों को बचाया जा सकता है.
आजतक साइंस डेस्क