Artemis-II मिशन... चार एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के चारों ओर 'विशाल आठ' बनाएंगे

नासा का आर्टेमिस-II मिशन फरवरी 2026 में लॉन्च होगा. चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में SLS रॉकेट से चंद्रमा के पास जाएंगे. वे फिगर-8 फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी से उड़ान भरेंगे. चंद्रमा के फार साइड से गुजरेंगे लेकिन लैंडिंग नहीं करेंगे. मिशन 10 दिन का है जो सुरक्षा टेस्ट और आर्टेमिस-III (चंद्रमा लैंडिंग) की तैयारी है.

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चांद के चारों तरफ ओरियन स्पेसक्राफ्ट एक विशाल 8 की आकृति बनाएगा. (Photo: NASA) चांद के चारों तरफ ओरियन स्पेसक्राफ्ट एक विशाल 8 की आकृति बनाएगा. (Photo: NASA)

रदीफा कबीर

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

नासा का आर्टेमिस-II मिशन इतिहास रचने वाला है. 50 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के आसपास जाएंगे. यह मिशन अक्टूबर 2022 में हुए अनक्रूड आर्टेमिस-I के बाद पहला मानवयुक्त मिशन है. चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट से उड़ान भरेंगे. लॉन्च की तारीख फरवरी 2026 की शुरुआत में संभावित है (सबसे पहले 6 फरवरी), लेकिन अभी फाइनल नहीं हुई. क्रू अभी क्वारंटाइन में हैं.

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क्रू मेंबर कौन हैं?  

  • कमांडर: रीड वाइजमैन (Reid Wiseman) – अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री.  
  • पायलट: विक्टर ग्लोवर (Victor Glover) – अमेरिकी.  
  • मिशन स्पेशलिस्ट: क्रिस्टिना कोच (Christina Koch) – अमेरिकी.  
  • मिशन स्पेशलिस्ट: जेरेमी हैंसेन (Jeremy Hansen) – कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के पहले अंतरिक्ष यात्री जो चंद्रमा के पास जाएंगे.

यह टीम चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगी, लेकिन लैंडिंग नहीं करेगी. मिशन कुल 10 दिन का होगा.

मिशन का रास्ता क्या है? फिगर-8 क्यों?

यह कोई सीधी उड़ान नहीं है. अंतरिक्ष यात्री फिगर-8 (आठ जैसा बड़ा लूप) बनाएंगे. इसे फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी कहते हैं.  

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कैसे काम करता है?  

  • लॉन्च के बाद: SLS रॉकेट ओरियन को पृथ्वी की ऊंची एलिप्टिकल ऑर्बिट में डालेगा.  
  • पहले 24 घंटे: पृथ्वी की ऊंची ऑर्बिट (लगभग 70,000 किमी तक) में रहेंगे. यहां ओरियन के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, हीट शील्ड आदि की जांच होगी. अगर कोई समस्या हो तो जल्दी वापस आ सकते हैं.  
  • ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI): इंजन जलाकर चंद्रमा की ओर भेजा जाएगा. यह 4 दिन की यात्रा होगी.  
  • चंद्रमा के पास: चंद्रमा की ग्रैविटी से स्लिंगशॉट इफेक्ट होगा. स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के फार साइड (पीछे वाले हिस्से) से गुजरेगा, 6000 से 10000 किमी ऊपर. यहां से फिगर-8 का लूप पूरा होगा.  
  • वापसी: चंद्रमा की ग्रैविटी खुद ही स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की ओर मोड़ देगी. अगर इंजन फेल भी हो जाएं, तो ग्रैविटी के कारण सुरक्षित वापस आएंगे – कोई अतिरिक्त बर्न की जरूरत नहीं.

यह ट्रैजेक्टरी सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. अपोलो मिशन्स में भी यही इस्तेमाल हुआ था. यह फिजिक्स का कमाल है – ग्रैविटी खुद 'सेफ्टी नेट' बन जाती है.

इस मिशन का महत्व क्या है?  

  • सुरक्षा टेस्ट: ओरियन के हीट शील्ड 40,000 किमी/घंटा की स्पीड से एंट्री पर 2760°C तक गर्म होगा – यह चेक होगा.  
  • रिकॉर्ड: अंतरिक्ष यात्री अपोलो-13 से ज्यादा दूर (230,000+ मील) जाएंगे.  
  • चंद्रमा का नजारा: फार साइड से अर्थराइज (पृथ्वी का उगना) देखेंगे, क्रेटर्स का क्लोज व्यू.  
  • भविष्य की तैयारी: आर्टेमिस-III में पहली महिला और रंगीन व्यक्ति चंद्रमा पर उतरेंगे. यह मिशन लूनर बेस और मंगल मिशन की नींव रखेगा.

आर्टेमिस-II मानवता को फिर से चंद्रमा के करीब ले जाएगा. यह सिर्फ उड़ान नहीं, बल्कि नई स्पेस एरा की शुरुआत है. 

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