Roti Vastu Niyam: इन तिथियों पर नहीं बनानी चाहिए रोटी, मां अन्नपूर्णा हो जाती हैं नाराज

Roti Vastu Niyam: हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी विशेष तिथियों और त्योहारों का जिक्र है, जब घर में रोटी बनाना या चूल्हे पर तवा चढ़ाना पूरी तरह वर्जित होता है. माना जाता है कि इन दिनों तवे का इस्तेमाल करने से राहु दोष बढ़ता है और मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं.

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रोटी के वास्तु टिप्स (Photo: ITG) रोटी के वास्तु टिप्स (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

Roti Vastu Niyam: हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में रोटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों का जिक्र मिलता है. वहीं, रोटी से संबंधित यह भी मान्यता है कि इस कुछ विशेष तिथियों और त्योहारों पर नहीं बनाना चाहिए या वर्जित माना गया है. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों चूल्हे पर तवा चढ़ाने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और घर की सुख-समृद्धि प्रभावित होती है. यहां उन प्रमुख तिथियों और अवसरों की सूची दी गई है, जिनमें रोटी नहीं बनानी चाहिए. 

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शीतला अष्टमी या बासोड़ा 
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है. इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और न ही चूल्हा जलाया जाता है. इस दिन बासी भोजन (एक दिन पहले बना हुआ) मां शीतला को चढ़ाया जाता है और वही प्रसाद स्वरूप में खाया जाता है.

नागपंचमी 
नागपंचमी के दिन किचन में लोहे की कड़ाही या तवे का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित होता है. माना जाता है कि तवा नाग के फन का प्रतीक होता है, इसलिए इस दिन तवे पर रोटी नहीं सेकनी चाहिए. इस दिन अमूमन पूरी या हलवा बनाया जाता है.

शरद पूर्णिमा 
अश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा के दिन भी घर में रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए खीर-पूरी या सात्विक पकवान बनाने की परंपरा है.

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दीपावली 
सुख-समृद्धि के सबसे बड़े त्योहार दीपावली के दिन भी रात के समय रसोई में रोटी नहीं बनाई जाती है. इस दिन मां लक्ष्मी के भोग के लिए विशेष पकवान, पूरी और मिठाइयां तैयार की जाती हैं.

घर में मृत्यु होने पर (शोक के समय)

मृत्यु के दिन और सूतक काल 
यदि परिवार में किसी सदस्य का निधन हो जाता है, तो उस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता और रोटी नहीं बनाई जाती है. अमूमन दाह संस्कार के बाद पड़ोसियों या रिश्तेदारों के घर से ही भोजन आता है.

तेरहवीं तक नियम 
कुछ क्षेत्रों में जब तक दिवंगत आत्मा की शांति के लिए 13वीं (तेरहवीं) की क्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक घर में सामान्य तौर पर सादी रोटी नहीं सेकी जाती; केवल पूरियां या तलकर बनाया जाने वाला भोजन ही बनता है.

इसके पीछे का धार्मिक और वास्तु कारण

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, तवे को राहु का प्रतीक माना गया है. कुछ विशेष शुभ अवसरों पर या मां लक्ष्मी के आगमन के दिनों में तवे पर सीधे रोटी सेकने के बजाय मीठे पकवान, पूरी या हलवा बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि ये व्यंजन समृद्धि और उत्सव का प्रतीक हैं.

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