क्या आप जानते हैं घर में गलत दिशा में लगाया गया शीशा आपके पारिवारिक रिश्तों में दरार ही नहीं, बल्कि तलाक तक की नौबत लेकर आ सकता है. हालांकि शीशा किसी भी दिशा में लगाया जा सकता है. बशर्ते वह छोटे आकार का हो. लेकिन ऐसा शीशा जो आपका पूरा प्रतिबिम्ब दर्शाता है, उसे जल व वायु तत्व की ही दिशा में लगाना चाहिए. व्यक्ति का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब दर्शाने वाला शीशा यदि भूमि व अग्नि तत्व की दिशाओं में लगा दिया जाए तो आर्थिक तंगी के साथ संबंधों और व्यक्ति के मान सम्मान को भी प्रभावित कर सकता है. इसलिए यदि आपकी ड्रेंसिग टेबिल उत्तर से लेकर पश्चिम दिशा के बीच है तो छोटे आकार का शीशा प्रयोग करना लाभकारी रहेगा. उत्तर-पश्चिम से पूर्व दिशा तक आप अपनी ड्रेसिंग में बड़े आकार का शीशा प्रयोग कर सकते हैं.
किस तत्व की श्रेणी में आता है शीशा?
वास्तु के अनुसार, शीशा जल तत्व की श्रेणी में आता है. इसलिए बड़े आकार का ऐसा शीशा जो आपके पूरे प्रतिबिम्ब को दर्शाए उसे नॉर्थ-वेस्ट से लेकर पूर्व दिशा की ओर लगाना ही लाभकारी होगा. यानी कुछ आकाश तत्व की दिशा के साथ जल व वायु तत्व की दिशाओं में बड़े आकार का शीशा लगाना भी लाभकारी होता है. जबकि सिर्फ आपके कंधों तक की छवि को दर्शाने वाला शीशा किसी भी दिशा में लगाया जा सकता है.
कहां क्या नकारात्मक प्रभाव देगा बड़े आकार का शीशा?
बड़े आकार का शीशा सबसे ज्यादा अग्नि व भूमि तत्व की दिशाओं में नकारात्मक प्रभाव देता है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में बड़े आकार परिवार में रिश्तों में दरार यहां तक की तलाक तक की नौबत ला सकता है. और व्यक्ति वास्तु के अनुसार सब कुछ ठीक होने पर भी समझ की नहीं पाता कि कारण क्या है. वहीं साउथ-साउथ-वेस्ट में बेवजह के खर्चे और दक्षिण दिशा में बड़े आकार का शीशा आपने मान सम्मान को हानि पहुंचा सकता है. व्यापार की दृष्टि से देखे तो आपके प्रोडक्ट की साख गिर सकती है, यहां बड़े आकार का शीशा होने से. जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा में बार-बार दुर्घटना या आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है.
ऐसी गलती न करें
कई बार लोग उत्तर दिशा के भारीपन कम करने और पश्चिम या दक्षिण दिशा में भारीपन बढ़ाने के लिए बड़े आकार का शीशा लगा देते हैं. यह लोगों की भ्रांति है कि अपने अन्दर सामने की चीज को प्रतिबिम्ब के रूप में समाहित कर बड़े आकार का शीशा उस स्थान पर भारीपन ला सकता है. ऐसी गलती करने से अग्नि या भूमि तत्व में जल बढ़ने से वास्तु दोष पैदा हो जाता है, जो अच्छे के बजाय नकारात्मक परिणाम देता है.
अंशु पारीक