श्याम, श्वेत... राम मंदिर के लिए तीन मूर्तियां फाइनल, 1949 से जिस विग्रह की हो रही पूजा वह कहां स्थापित... जानें किस मूर्ति का श्रद्धालु कहां कर पाएंगे दर्शन

रामलला की जिस मूर्ति की गर्भगृह में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा होनी है, वह मूर्ति शास्त्रों के वर्णित श्रीराम के रूप रंग के अनुरूप श्यामल रंग की ही होगी. गर्भगृह की मूर्ति कर्नाटक के पत्थरों से निर्मित होगी. वहीं, राजस्थान के सफेद संगमरमर से निर्मित मूर्ति मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित होगी.

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बनबीर सिंह

  • अयोध्या,
  • 04 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख (22 जनवरी) बेहद नजदीक आ चुकी है. ऐसे में अब इस बात को लेकर चर्चा छिड़ गई है कि आखिर मंदिर के लिए निर्मित हो चुकीं तीन मूर्तियों में से कौन सी मूर्ति की गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. इन चर्चाओं के बीच आइए आपको श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए निर्मित तीनों मूर्तियों और 1949 से पूजित मूर्तियों के बारे में बताते हैं. आपको यह भी बताते हैं कि किस मूर्ती को कहां पर स्थापित किया जाएगा.

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दरअसल, रामलला की जिस मूर्ति की गर्भगृह में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा होनी है, वह मूर्ति शास्त्रों के वर्णित श्रीराम के रूप रंग के अनुरूप श्यामल रंग की ही होगी. गर्भगृह की मूर्ति कर्नाटक के पत्थरों से निर्मित होगी. वहीं, राजस्थान के सफेद संगमरमर से निर्मित मूर्ति मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित होगी. श्यामल पत्थर से ही बनी तीसरी मूर्ति को भी वहीं स्थान दिया जाएगा.

श्याम वर्ण की मूर्ति को किया गया स्वीकार

मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक तीनों मूर्तियां बहुत सुंदर और आकर्षण हैं. उन्हें यह बात मूर्तियां देखने वालों ने बताई है. किसी मूर्ति में कोई कमी नहीं है. गर्भगृह में स्थापित होने वाली मूर्ति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि गर्भगृह में स्थापित करने के लिए श्याम वर्ण की मूर्ति को ही लोगों ने स्वीकार किया है. शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि श्रीराम श्याम वर्ण के थे. इसलिए श्याम वर्ण की मूर्ति ही प्रथम गर्भगृह में स्थापित की जा रही है. बाकी की दोनों मूर्तियों को भी दर्शन के लिए रखा जाए. हालांकि, उनकी प्राण प्रतिष्ठा दोनों तल बन जाने के बाद ही होगी. राम मंदिर ट्रस्ट ऐसी व्यवस्था बनाएगा कि नीचे रामलला का और उसके ऊपर अन्य मूर्तियों के दर्शन हो सकें. 

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इसलिए बनाई जा रही श्याम रंग की मूर्ति

आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि उत्तर भारत में ज्यादातर मूर्तियां सफेद संगमरमर या अष्टधातु से बनाई जाती हैं, लेकिन दक्षिण भारत में मूर्तियां श्याम रंग की होती हैं. शास्त्रों में वर्णन है निलांबुजम श्यामम कोमलांगम... इसलिए श्यामल रंग ही श्रीराम का माना जाता है. शास्त्रों के आधार पर श्रीराम की मूर्ति नील यानी श्यामल रंग की होनी चाहिए.

कहां जाएगी 75 साल की पुरानी मूर्ति

नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बीच अब सवाल उठ रहा है कि जो मूर्ति अस्थाई मंदिर में विराजमान है और जिसकी पूजा 1949 से हो रही है उसका क्या होगा. यह मूर्तियां भी निर्माणाधीन भव्य मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान होंगी. दरअसल, विराजमान रामलला की तरफ से ही मुकदमा हुआ और इसी विराजमान मूर्ति की तरफ से मुकदमा जीता गया है. इसलिए प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह मूर्तियां चल यानी उत्सव की मूर्तियां हो जाएंगी. ये मूर्तियां भी प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति के पास ही विराजमान होंगी.

पुरानी मूर्ति के लिए भी मंदिर में स्थान 

आचार्य सत्येंद्र ने बताया कि 23 दिसंबर 1949 से पुरानी मूर्ति की पूजा ही होती आ रही है. पहले विवादित मंदिर में उसके बाद त्रिपाल में और उसके बाद अब अस्थाई मंदिर में पूजा हो रही है. देवकीनंदन अग्रवाल ने जो मुकदमा दायर किया था वह विराजमान रामलला के नाम से ही था. इसी पर दावा हुआ और कोर्ट ने माना कि वहां पर रामलला विराजमान हैं. इसी कारण से रामलला के पक्ष में जजमेंट आया और अब भव्य और दिव्य मंदिर बन गया है. इसलिए विराजमान रामलला की मूर्ति बड़ी महत्वपूर्ण है. जब भी कोई इतिहास में देखेगा वह कहेगा कि वह मूर्ति कहां है, जिसके बल पर मुकदमे में जीत मिली थी इसलिए इस मूर्ति को गर्भगृह में जरूर रखना होगा. भले ही यह अचल ना होकर चल मूर्ति यानी उत्सव मूर्ति हो. वर्तमान में जो बात इस मूर्ति में है वह किसी मूर्ति में नहीं हो सकती, क्योंकि इसी की देन है कि आज रामलला के पक्ष में मुकदमा विजय हुआ है और मंदिर बन रहा है. 

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बहुमत के आधार पर मूर्ति का चयन

वहीं, श्रीराम जन्मभूमि के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता का कहना है कि बहुमत के आधार पर कर्नाटक की मूर्ति का चयन लोगों ने किया है. कर्नाटक की मूर्ति और संगमरमर की दूसरी मूर्ती कहां स्थापित होंगी, इसका फैसला 5 तारीख के बाद किया जाएगा. मूर्तियां गर्भ गृह और प्रथम तल में लगाई जाएंगी. शास्त्रों में श्रीराम जी का वर्ण श्याम और लक्ष्मणजी का वर्ण गौर बताया गया है. दरअसल रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के श्यामल वर्ण का वर्णन किया गया है.

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