Hindu Dharam: कलयुग के 5 संकेत, जो हजारों साल पहले ही बता दिए गए थे! महाभारत की इस कथा में छिपा है रहस्य

Hindu Dharam: महाभारत की यह पौराणिक कथा कलयुग में मनुष्य के बदलते स्वभाव, कथनी-करनी के अंतर और दिखावे की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है. श्रीकृष्ण के मुताबिक, कलयुग के इस अंधकार में केवल हरि नाम का स्मरण ही मनुष्य को सही राह पर रख सकता है.

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महाभारत (Photo: ITG) महाभारत (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

Hindu Dharam: महाभारत काल से जुड़ी एक ऐसी कथा है, जिसमें पांडवों ने कुछ अजीब घटनाएं देखीं और उनका अर्थ जानने के लिए भगवान श्रीकृष्ण से सवाल किया. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने इन घटनाओं को कलयुग के आने वाले समय से जोड़कर समझाया था. इन पांच घटनाओं में इंसान के बदलते व्यवहार, माता-पिता के प्रेम, दिखावे की प्रवृत्ति और कलयुग में धर्म की स्थिति से जुड़े संकेत बताए गए हैं. हालांकि, इन प्रसंगों को धार्मिक कथा और मान्यता के रूप में समझना चाहिए. आइए जानते हैं वे पांच संकेत क्या थे.

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युधिष्ठिर ने देखा दो मुंह वाला सांप

कथा के अनुसार, एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से एक विचित्र घटना के बारे में पूछा. उन्होंने दो मुंह वाले सांप को देखने की बात कही. तब श्रीकृष्ण ने इसका संबंध कलयुग से बताते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसे लोग बढ़ेंगे, जो सामने कुछ और पीछे कुछ और होंगे. उनके शब्द और कर्म एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होंगे. यानी इंसान की पहचान उसकी बातों से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से होगी.

अर्जुन ने देखा वेद लिखे पंखों वाला पक्षी

इसके बाद अर्जुन ने भी एक विचित्र दृश्य देखा. कथा के अनुसार, उन्होंने एक ऐसे पक्षी को देखा जिसके पंखों पर वेद लिखे हुए थे, लेकिन वह मांस खा रहा था. अर्जुन ने जब इसका अर्थ पूछा तो श्रीकृष्ण ने इसे भी कलयुग से जोड़कर समझाया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कुछ लोग ज्ञान और धर्म की बातें तो खूब करेंगे, लेकिन उनका आचरण उनकी बातों के बिल्कुल विपरीत होगा. यानी मुंह पर धर्म और व्यवहार में अधर्म.

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भीम ने देखा बछड़े को लहूलुहान करती गाय

इसके बाद भीम ने एक गाय को अपने बछड़े को बहुत प्यार से चाटते हुए देखा. लेकिन उसका प्यार इतना अधिक था कि बछड़ा घायल होकर लहूलुहान हो गया था. भीम ने जब श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो उन्होंने कहा कि कलयुग में माता-पिता का बच्चों के प्रति जरूरत से ज्यादा मोह भी उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है. माता-पिता बच्चों को हर परेशानी से बचाने की कोशिश करेंगे. उनकी हर गलती को नजरअंदाज करेंगे और उन्हें संघर्ष करने का मौका नहीं देंगे. ऐसा अंधा प्रेम कई बार बच्चों को मजबूत बनाने के बजाय उनका विकास रोक सकता है.

सहदेव ने देखा सूखा कुआं

सहदेव ने भी एक अजीब दृश्य देखा. उन्होंने कई पानी से भरे कुओं के बीच एक ऐसा कुआं देखा, जो पूरी तरह सूखा हुआ था. श्रीकृष्ण ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि कलयुग में इंसान दिखावे पर खूब धन खर्च करेगा, लेकिन जरूरतमंदों की मदद करने से पीछे हट सकता है. लोग अपनी प्रतिष्ठा और दिखावे के लिए बड़ी रकम खर्च करेंगे, लेकिन किसी भूखे या गरीब व्यक्ति की मदद करने में उन्हें उतनी दिलचस्पी नहीं होगी. यानी पैसा होगा, साधन होंगे, लेकिन जरूरतमंद के लिए संवेदना कम होती जाएगी.

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नकुल ने देखी गिरती हुई विशाल चट्टान

आखिर में नकुल ने एक विशाल चट्टान को तेजी से नीचे गिरते हुए देखा. वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को नष्ट करती जा रही थी. लेकिन एक छोटी सी जगह पर पहुंचकर वह चट्टान रुक गई. नकुल ने जब इसका अर्थ पूछा तो श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए इसे कलियुग से जोड़ा. कथा के अनुसार, कलयुग में मनुष्य का पतन भी इसी तरह तेजी से होगा. लेकिन इस अंधकार के बीच उसके लिए एक छोटा सा सहारा भी मौजूद रहेगा.

कलयुग में क्या बचाएगा इंसान को?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलयुग में भगवान का नाम ही मनुष्य के लिए सबसे बड़ा सहारा माना गया है. कथा में कहा गया है कि जब इंसान अपने कर्मों और मोह के कारण पतन की ओर बढ़ेगा, तब भगवान का स्मरण उसे सही रास्ते पर लौटने की शक्ति देगा.

राम नाम हो, हरि नाम हो या राधा-कृष्ण का स्मरण- भक्ति को कलयुग में मुक्ति और आत्मिक शांति का सरल मार्ग माना गया है. यही वजह है कि सनातन परंपरा में कलयुग के लिए नाम-स्मरण और भगवान की भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है.

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