Hindu Dharam: क्या सैकड़ों साल पहले लिखी गई भविष्यवाणियां आज के दौर की घटनाओं का संकेत दे सकती हैं? ओडिशा के महान संत अच्युतानंद दास और पंचसखाओं से जुड़ी भविष्यमालिका को लेकर अक्सर दावे होते रहते हैं. माना जाता है कि करीब 500 से 600 साल पहले ताड़ के पत्तों पर लिखे गए इन ग्रंथों में भविष्य से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें दर्ज हैं. ग्रंथ के अनुयायियों और कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि इनमें वर्णित कई संकेत समय के साथ सच साबित हुए और उनका संबंध समकालीन इतिहास व वर्तमान घटनाओं से जोड़ा जाता है. हालांकि, भविष्यमालिका की भविष्यवाणियों और उनकी व्याख्याओं को लेकर अलग-अलग मत हैं. क्या इनमें वास्तव में भविष्य की झलक छिपी है.
जब गिरा था जगन्नाथ मंदिर का कल्पवृक्ष
भविष्यमालिका से जुड़ी एक चर्चित भविष्यवाणी में कहा जाता है कि कलयुग के अंतिम चरण की शुरुआत के कुछ संकेत दिखाई देंगे और इनमें से एक संकेत पुरी के जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कल्पवृक्ष से जुड़ा होगा. मान्यता है कि जब यह प्राचीन बरगद का पेड़ टूटकर गिरने लगेगा, तो इसे आने वाले बड़े बदलावों और संकटों का संकेत माना जाएगा.
इस भविष्यवाणी को साल 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन से जोड़कर देखा जाता है. उस विनाशकारी चक्रवात के दौरान कल्पवृक्ष की कई बड़ी शाखाएं टूटकर गिर गई थीं. इसके बाद भविष्य मालिका के अनुयायियों ने इसे ग्रंथ में बताए गए संकेतों से जोड़ना शुरू कर दिया. हालांकि, इस घटना और भविष्यवाणी के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन मालिका से जुड़े रहस्यों की चर्चा में यह घटना आज भी प्रमुखता से शामिल की जाती है.
मंदिर के शिखर से पत्थरों का गिरना
भविष्यमालिका से जुड़ी एक अन्य भविष्यवाणी भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपरी हिस्से से संबंधित बताई जाती है. मान्यता है कि मंदिर के शिखर या नीलचक्र के आसपास से भारी पत्थरों के नीचे गिरने की घटनाएं किसी बड़े संकट या आने वाले कठिन समय का संकेत हो सकती हैं.
बीते वर्षों में जगन्नाथ मंदिर के ऊपरी हिस्से से पत्थर गिरने की कुछ घटनाएं सामने आईं थीं, जिसके बाद मंदिर की संरचना और उसके संरक्षण को लेकर भी चिंता जताई गई थी. इन घटनाओं को भविष्य मालिका में वर्णित संकेतों से जोड़कर देखा गया और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई तरह के दावे किए गए थे. हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि ये घटनाएं वास्तव में किसी भविष्यवाणी के अनुसार हुईं या फिर बाद में उन्हें मालिका के कथनों से जोड़कर व्याख्यायित किया गया. यही अनिश्चितता भविष्य मालिका को और भी रहस्यमयी बना देती है.
घातक महामारियों का फैलना
भविष्यमालिका से जुड़ी एक भविष्यवाणी में ऐसे समय का उल्लेख किया जाता है, जब दुनिया अचानक फैलने वाली गंभीर और रहस्यमयी बीमारियों से परेशान होगी. कहा जाता है कि इन रोगों का असर इतना तेज होगा कि चिकित्सा जगत भी शुरुआती दौर में इनके सामने असहाय नजर आ सकता है और बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है.
मालिका के अनुयायी इस कथन को साल 2020 में फैली कोरोना महामारी से जोड़कर देखते हैं. COVID-19 ने कुछ ही समय में पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था और इसके बाद भी अलग-अलग वायरस और संक्रामक बीमारियों को लेकर चिंताएं बनी रहीं. हालांकि, यह तय करना मुश्किल है कि मालिका में वर्णित संकेत वास्तव में कोरोना महामारी की ओर इशारा करते थे या फिर बाद की घटनाओं के आधार पर उनकी व्याख्या की गई.
नैतिक मूल्यों में गिरावट और रिश्तों में बढ़ती दूरियां
भविष्यमालिका में समाज और पारिवारिक रिश्तों के बदलते स्वरूप को लेकर भी कई बातें कही जाती हैं. मान्यता है कि एक समय ऐसा आएगा, जब लोगों में क्रोध, लालच और स्वार्थ की भावना बढ़ जाएगी. रिश्तों में अपनापन कम होगा और परिवार के सदस्य ही एक-दूसरे से दूर होने लगेंगे. माता-पिता और संतान के बीच भी मतभेद और टकराव बढ़ने की बात कही जाती है.
आज के दौर में बढ़ते पारिवारिक विवाद, रिश्तों में तनाव और बुजुर्गों के अकेलेपन जैसी स्थितियों को कुछ लोग इस भविष्यवाणी से जोड़ते हैं. वृद्धाश्रमों की बढ़ती जरूरत और बदलती पारिवारिक व्यवस्था को भी इसके उदाहरण के रूप में पेश किया जाता है. हालांकि, सामाजिक बदलावों को किसी एक भविष्यवाणी का प्रमाण मानना आसान नहीं है, क्योंकि हर दौर में समाज और रिश्तों का स्वरूप बदलता रहा है.
अनाज में स्वाद और पोषण की कमी
भविष्यमालिका में धरती की बदलती स्थिति और खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर भी एक चेतावनी का जिक्र किया जाता है. मान्यता है कि समय के साथ जमीन की उर्वरता प्रभावित होगी और अनाज भले ही देखने में अच्छा लगे, लेकिन उसके प्राकृतिक स्वाद और पोषण में कमी आने लगेगी. पशुधन और कृषि उत्पादन में बदलाव के संकेतों का भी उल्लेख किया जाता है.
आज आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल, मिट्टी की गुणवत्ता और भोजन की पौष्टिकता को लेकर लगातार बहस होती रही है. भविष्यमालिका के कुछ अनुयायी इन बदलावों को ग्रंथ में बताए गए संकेतों से जोड़ते हैं. हालांकि, यह कहना कि आज का पूरा भोजन पौष्टिकता खो चुका है या पूरी तरह हानिकारक हो गया है, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा. इसलिए इस भविष्यवाणी को लेकर किए जाने वाले दावों को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है.
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