शरद पूर्णिमा सनातन धर्म में बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है. यही कारण है कि इस पावन रात्रि को शुद्ध चावल और दूध से खीर बनाकर खुले आसमान या छत पर रखने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है, ताकि उस पर चंद्रमा की शीतल और आरोग्यदायी किरणें सीधे पड़ सकें. इस खीर का भगवान को भोग लगाकर परिवार सहित प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से शरीर स्वस्थ, निरोगी और सुंदर बनता है.