यम पंचक शुरू होने वाला है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज पर समापन होता है. इस साल यम पंचक शुक्रवार, 6 नवंबर से शुरू होगा और बुधवार, 11 नवंबर को समाप्त होगा. इन पवित्र दिनों भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, कुबेर और यमराज की पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि यम पंचक में यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.
यम पंचक में क्यों किया जाता है दीपदान?
वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेदप्रकाश मिश्रा के अनुसार, दीपावली के आस-पास आने वाले इन दिनों में यमराज की पूजा और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता में यमराज मृत्यु के देवता हैं और उनकी प्रसन्नता के लिए कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की शाम दीपदान किया जाता है. इसे यम दीपदान या यम दीपम भी कहते हैं.
यम पंचक 2026 तिथि
इस साल यम पंचक पांच की जगह छह दिन रहने वाला है. इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर पांच अलग-अलग त्योहार मनाए जाएंगे.
6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस
8 नवंबर, रविवार: नरक चतुर्दशी और दिवाली
10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा
11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज
यम पंचक में किस दिन क्या करें?
धनतेरस: धन्वंतरि, लक्ष्मी-कुबेर और यमराज की पूजा
धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहते हैं. इस दिन सोने-चांदी की आभूषण, नए बर्तन और नई चीजों की खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है. इस दिन अच्छे स्वास्थ्य के लिए भगवान धन्वंतरि और धन-संपत्ति में वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी और कुबेर देव की उपासना की जाती है.
नरक चतुर्दशी: सूर्योदय से पहले स्नान और यम दीप
नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शाम को यमराज के निमित्त दीप जलाया जाता है. दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है. इसलिए इस ओर दीप रखने की परंपरा भी प्रचलित है. मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.
दिवाली: मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा
धन और सुख-समृद्धि के लिए दिवाली की रात देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है. इस दिन घर में दीपक जलाए जाते हैं और सुख-शांति व समृद्धि की कामना की जाती है. इस दिन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है.
गोवर्धन पूजा: भगवान श्रीकृष्ण की आराधना
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण की उपासना की जाती है. इस अवसर पर गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की परंपरा है. कई घरों और मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन होता है और भगवान को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है. 56 भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है.
भाई दूज: यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा पर्व
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है. मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे. यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया और तिलक लगाकर उनकी मंगलकामना की. तभी से इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं.
aajtak.in