27 जुलाई से शनि मीन राशि में वक्री हो रहे हैं और 11 दिसंबर तक इसी अवस्था में रहने वाले हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार, शनि देव धनु राशि के द्वितीय और तृतीया भाव के स्वामी होते हैं और चतुर्थ भाव में वह वक्री हो रहे हैं. इस राशि पर शनि की ढैय्या भी चल रही है. चतुर्थ भाव में शनि सामान्यतः मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और घरेलू मामलों पर प्रभाव डालता है. हालांकि वक्री होने के बाद कई पुराने तनाव कम भी हो सकते हैं और रुके कार्यों में गति आ सकती है. आइए जानते हैं कि धनु राशि वालों को वक्री शनि कैसे परिणाम देने वाला है.
आर्थिक स्थिति
धन संबंधी मामलों में यह समय मिश्रित परिणाम दे सकता है. आपकी आमदनी बढ़गी, लेकिन खर्चों को लेकर थोड़ा सतर्क रहना होगा. किसी पुराने निवेश या संपत्ति से जुड़े मामले में राहत मिलने की संभावना है. यदि लंबे समय से घर, जमीन या वाहन से जुड़ा कोई आर्थिक विवाद चल रहा था तो उसमें समाधान की दिशा बन सकती है. अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने से आर्थिक स्थिति पहले से अधिक संतुलित रहेगी.
करियर और कारोबार
नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यस्थल का माहौल धीरे-धीरे अनुकूल होता दिखाई देगा. यदि स्थानांतरण या विभाग बदलने को लेकर असमंजस था तो उसमें कुछ राहत मिल सकती है. व्यापारियों के लिए भी पुराने रुके हुए काम आगे बढ़ने के संकेत हैं. हालांकि नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पूरी योजना बनाकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा. सहकर्मियों और अधिकारियों के साथ तालमेल बनाए रखने से लाभ मिलेगा.
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य के लिहाज से यह समय पहले की तुलना में राहत देने वाला हो सकता है. यदि लंबे समय से सीने, श्वसन तंत्र या तनाव से जुड़ी परेशानी चल रही थी तो उसमें धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल सकते हैं. फिर भी नियमित दिनचर्या, पर्याप्त आराम और संतुलित भोजन पर ध्यान देना जरूरी रहेगा. मानसिक शांति बनाए रखने के लिए योग और ध्यान भी लाभदायक साबित हो सकते हैं.
रिश्ते-नाते
परिवार और रिश्तों के मामले में वक्री शनि सकारात्मक बदलाव ला सकता है. रिश्तेदारों या भाई-बहनों के साथ चली आ रही गलतफहमियां दूर होने की संभावना है. घर का वातावरण पहले की तुलना में अधिक शांत और सहयोगपूर्ण रहेगा. हालांकि छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने से बचें, क्योंकि कुछ समय के लिए पारिवारिक अपेक्षाएं बढ़ सकती हैं. जीवनसाथी और परिवार के साथ संवाद बनाए रखने से रिश्ते और मजबूत होंगे.
उपाय
नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें. यदि संभव हो तो प्रत्येक शनिवार भगवान हनुमान के मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें. यह उपाय शनि के शुभ प्रभाव को मजबूत करने और जीवन की बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है.
aajtak.in