Rama Ekadashi 2026: कब है रमा एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का समय

Rama Ekadashi 2026: रमा एकादशी 2026 का व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा. जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत पारण का समय और भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की पूजा का धार्मिक महत्व.

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इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने का विधान है.  इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने का विधान है. 

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

Rama Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है.  इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है. कार्तिक मास में पड़ने वाली रमा एकादशी को भी बेहद खास माना जाता है.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है.  इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है.  अगर आप भी रमा एकादशी का व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो जान लें इसकी सही तारीख, तिथि, पूजा का शुभ समय और पारण का मुहूर्त. 

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रमा एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा.  यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है.  इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने का विधान है. 

रमा एकादशी 2026 की तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, रमा एकादशी की तिथि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 3 मिनट पर शुरू होगी.  इसका समापन 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगा.  उदया तिथि के आधार पर 5 नवंबर को रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. 

 रमा एकादशी 2026 की जरूरी तारीखें और समय: 

-  रमा एकादशी की तारीख:  5 नवंबर 2026, गुरुवार
-  एकादशी तिथि शुरू:  4 नवंबर, सुबह 11:03 बजे
-  एकादशी तिथि समाप्त:  5 नवंबर, सुबह 10:35 बजे
-  व्रत पारण की तारीख:  6 नवंबर 2026, शुक्रवार
-  पारण का समय:  सुबह 6:37 बजे से 8:48 बजे तक

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ये समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं.  अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण के समय में अंतर हो सकता है. 

 रमा एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है?

रमा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने, पूजा करने और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है.  माना जाता है कि इस व्रत से जीवन में सुख-शांति आती है . 

माता लक्ष्मी को रमा नाम से भी जाना जाता है.  इसी वजह से इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया जाता है.  भक्त इस दिन भगवान से परिवार की खुशहाली, आर्थिक समृद्धि और सुखमय जीवन की कामना करते हैं. 

 रमा एकादशी की पूजा विधि

रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें.  इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.  पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रख सकते हैं. 

- सबसे पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. 
- भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन और फल अर्पित करें. 
- पूजा में तुलसी दल चढ़ाएं.  ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते साफ हों. 
- भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें. 
- रमा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें. 
- पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें. 
- अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करें. 

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 रमा एकादशी पर कैसे रखें व्रत?

एकादशी के दिन कई भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या पानी पीकर व्रत करते हैं.  व्रत रखने का तरीका व्यक्ति की सेहत, क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है.  इस दिन आमतौर पर चावल, गेहूं और अन्य अनाज खाने से परहेज किया जाता है. 

अगर आप पूरा दिन भूखे नहीं रह सकते, तो अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए फलाहार कर सकते हैं.  बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को कठोर व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. 

 रमा एकादशी व्रत का पारण कब करें?

एकादशी व्रत को अगले दिन द्वादशी तिथि में खोलने की परंपरा है.  इसे पारण कहा जाता है.  साल 2026 में रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर, शुक्रवार को किया जाएगा.  दिल्ली के पंचांग के अनुसार, पारण का समय सुबह 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण निर्धारित समय के भीतर करना चाहिए.  पारण के समय को लेकर अपने शहर के पंचांग को भी देख लें, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय के कारण समय में बदलाव हो सकता है. 

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