Quote of the Day: जुबान पर काबू रखना क्यों जरूरी है? रहीम का ये दोहा सिखाता है बड़ी बात

Quote of the Day: रहीम का प्रसिद्ध दोहा बताता है कि जुबान से निकले शब्द कितना गहरा असर डाल सकते हैं. जानें गुस्से में बोलने से बचने और वाणी पर संयम रखने की जरूरी सीख.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST

Quote of the Day: इंसान की पहचान सिर्फ उसके काम से नहीं, बल्कि उसकी बातों और व्यवहार से भी होती है.कई बार गुस्से या जल्दबाजी में मुंह से निकले कुछ शब्द रिश्तों को खराब कर देते हैं.बाद में इंसान को अपनी बात पर पछतावा भी होता है, लेकिन तब तक बात काफी आगे बढ़ चुकी होती है.कवि रहीम ने वाणी की इसी ताकत को समझाते हुए बेहद सरल लेकिन गहरी सीख दी है.

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रहीम का एक प्रसिद्ध दोहा है—

“रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पताल.
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”

इस दोहे में रहीम ने बताया है कि हमारी जुबान कई बार बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देती है.वह बोलकर तो मुंह के अंदर चली जाती है, लेकिन उसके गलत शब्दों का नुकसान इंसान को खुद झेलना पड़ता है.इस दोहे का भावार्थ भी यही है कि बोलने से पहले शब्दों के परिणाम के बारे में जरूर सोचना चाहिए.

गुस्से में बोलने से बचें

अक्सर गुस्से में इंसान ऐसी बातें कह देता है, जो सामान्य स्थिति में शायद कभी न कहे.उस समय सामने वाला भले ही चुप रहे, लेकिन शब्द उसके मन में रह जाते हैं.इसलिए किसी विवाद के दौरान तुरंत जवाब देने के बजाय कुछ देर शांत रहना बेहतर है.

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मीठी वाणी क्यों जरूरी है?

मीठा बोलने का मतलब हर बात में सहमत होना नहीं है.इसका अर्थ है कि अपनी बात बिना अपमान और कटु शब्दों के रखी जाए.एक ही बात को सख्त तरीके से कहने पर विवाद हो सकता है, जबकि विनम्र भाषा में कही गई वही बात आसानी से समझी जा सकती है.

शब्द रिश्ते बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी

रिश्तों में विश्वास बनाने में काफी समय लगता है, लेकिन एक गलत बात उस विश्वास को चोट पहुंचा सकती है.परिवार हो, दोस्ती हो या काम की जगह बातचीत का तरीका बहुत मायने रखता है.इसलिए बोलने से पहले यह सोचना जरूरी है कि हमारी बात सामने वाले पर कैसा असर डालेगी.

हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं

रहीम की सीख को आज की जिंदगी से जोड़कर देखें तो हर बात का तुरंत जवाब देना जरूरी नहीं है.सोशल मीडिया पर बहस हो या किसी से व्यक्तिगत विवाद, कई बार चुप रहना ही समझदारी होती है.जवाब देने से पहले खुद से पूछें—क्या यह बात कहना जरूरी है और क्या इसे बेहतर तरीके से कहा जा सकता है?

रहीम की सीख आज भी क्यों जरूरी है?

रहीम के नीति संबंधी दोहों की खासियत यही है कि वे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी बातों को आसान उदाहरणों के जरिए समझाते हैं.उनका यह दोहा हमें याद दिलाता है कि जुबान छोटी जरूर है, लेकिन उसके शब्दों का असर बहुत बड़ा हो सकता है.

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इसलिए बोलने से पहले थोड़ा रुकना, सोचकर जवाब देना और सामने वाले का सम्मान बनाए रखना रिश्तों के साथ-साथ हमारे व्यक्तित्व को भी बेहतर बनाता है.

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