Mahabharat Facts: महाभारत के 5 खतरनाक श्राप, जिनका आज कलयुग पर भी दिखता है असर!

Mahabharat Facts: महाभारत काल में दिए गए कुछ ऐसे श्राप हैं, जिनका असर आज भी हमारी दुनिया में देखने को मिलता है. युधिष्ठिर के कारण महिलाएं आज भी कोई गहरा राज क्यों नहीं छुपा पाती हैं? और राजा परीक्षित की मौत के बाद कैसे धरती पर कलयुग हावी हो गया? चलिए जानते हैं इन 5 सबसे शक्तिशाली श्रापों के पीछे का पूरा सच.

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महाभारत श्राप (Photo: ITG) महाभारत श्राप (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:16 AM IST

Mahabharat Facts: महाभारत को केवल एक युद्ध की कहानी मानना सही नहीं होगा, बल्कि यह जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है. इसमें कौरवों और पांडवों के बीच हुआ संघर्ष सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म के बीच का टकराव भी था. इस महाग्रंथ में हमें जीवन के कई पहलुओं जैसे कर्म, सच, रिश्ते और हमारे फैसलों के परिणाम, के बारे में गहरी सीख मिलती है. महाभारत के दौरान कई ऐसे प्रसंग भी सामने आते हैं, जहां श्राप दिए गए थे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन श्रापों का प्रभाव आज के कलयुग में भी देखने को मिलता है. लोग इन्हें कर्मों के फल और जीवन के लिए एक चेतावनी के रूप में मानते हैं.

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1. उर्वशी का अर्जुन को श्राप

एक बार अर्जुन दिव्य अस्त्र प्राप्त करने के लिए स्वर्ग लोक गए. वहां उनकी मुलाकात अप्सरा उर्वशी से हुई. उर्वशी अर्जुन को देखकर मोहित हो गईं, लेकिन अर्जुन उन्हें माता के समान मानते थे. यह बात उर्वशी को पसंद नहीं आई और क्रोध में उन्होंने अर्जुन को नपुंसक होने का श्राप दे दिया. जब अर्जुन ने यह बात देवराज इंद्र को बताई, तो इंद्र ने उन्हें समझाया कि यही श्राप उनके अज्ञातवास में वरदान साबित होगा. बाद में अर्जुन ने बृहन्नला का रूप धारण कर इस श्राप का लाभ उठाया.

2. युधिष्ठिर का स्त्रियों को श्राप

महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद माता कुंती ने पांडवों को एक बड़ा रहस्य बताया कि कर्ण उनका ही पुत्र था. यह सुनकर पांडव अत्यंत दुखी हुए, क्योंकि उन्होंने अपने ही भाई का वध किया था. इस घटना से आहत होकर युधिष्ठिर ने क्रोध में समस्त स्त्री जाति को श्राप दिया कि आगे से कोई भी स्त्री किसी भी रहस्य को छिपाकर नहीं रख पाएगी.

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3. परीक्षित को मिला श्राप

जब पांडव स्वर्ग की ओर प्रस्थान करने लगे, तो उन्होंने अपना राज्य अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को सौंप दिया. एक दिन राजा परीक्षित शिकार खेलने जंगल गए. वहां उन्होंने देखा कि शमीक ऋषि ध्यान में लीन हैं. राजा ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला. इससे क्रोधित होकर उन्होंने ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया. जब ऋषि के पुत्र को यह बात पता चली, तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सात दिन बाद तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी. माना जाता है कि परीक्षित की मृत्यु के बाद ही कलियुग का प्रभाव पृथ्वी पर बढ़ गया.

4. अश्वत्थामा को श्रीकृष्ण का श्राप

महाभारत युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने धोखे से पांडवों के पुत्रों का वध कर दिया. इसके बाद जब पांडव और श्रीकृष्ण उनका पीछा करते हुए महर्षि वेदव्यास के आश्रम पहुंचे, तो अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र चला दिया. अर्जुन ने भी अपने बचाव में ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन वेदव्यास जी ने दोनों को रोक दिया. अर्जुन ने अपना अस्त्र वापस ले लिया, परंतु अश्वत्थामा ऐसा नहीं कर सके और उन्होंने अस्त्र की दिशा बदलकर उत्तरा के गर्भ की ओर कर दी. इस पर क्रोधित होकर श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया कि वे हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकते रहेंगे और किसी से संवाद नहीं कर पाएंगे.

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5. ऋषि मांडव्य का यमराज को श्राप

एक बार राजा से भूल हो गई और उन्होंने निर्दोष ऋषि मांडव्य को फांसी की सजा दे दी. लंबे समय तक फांसी पर लटके रहने के बाद भी जब उनके प्राण नहीं गए, तब राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ. ऋषि मांडव्य ने बाद में यमराज से पूछा कि उन्हें यह सजा क्यों मिली. यमराज ने बताया कि बचपन में उन्होंने एक छोटे जीव को कष्ट दिया था, उसी का फल उन्हें मिला. इस पर ऋषि ने कहा कि बचपन में किए गए कर्मों का इतना कठोर दंड उचित नहीं है और उन्होंने यमराज को श्राप दिया कि उन्हें मनुष्य के रूप में जन्म लेना होगा.
इसके परिणामस्वरूप यमराज ने महाभारत काल में विदुर के रूप में जन्म लिया.

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