Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29 जुलाई, कब है गुरु पूर्णिमा? नोट करें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस दिन व्यक्ति का अन्न दान भी किया जाता है, मान्यता है कि अन्न दान करने से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद गुरु के पास जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.

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गुरु पूर्णिमा 2026 (Photo: ITG) गुरु पूर्णिमा 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:50 AM IST

Guru Purnima 2026: सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है. गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और सही दिशा दिखाई है. इसी पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है. आइए पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा की सही डेट क्या है.

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गुरु पूर्णिमा 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त (Guru Purnima 2026 Date)

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई 2026, बुधवार को पड़ रही है. इसी दिन पूरे देश में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा.

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 18 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 05 मिनट तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत व पूजन: 29 जुलाई 2026 

गुरु पूर्णिमा स्नान दान मुहूर्त (Guru Purnima 2026 Snan Daan Muhurat)

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान और दान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए. जिसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा? 

धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्रों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था. महर्षि व्यास को ही सनातन परंपरा में प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया था.

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इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार भेंट करते हैं और उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं.

गुरु पूर्णिमा का महत्व (Guru Purnima Significance)

सनातन संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है. 'गुरु' शब्द में 'गु' का अर्थ अंधकार और 'रु' का अर्थ प्रकाश होता है. अर्थात जो हमें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए, वही गुरु है. गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का पूजन करने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है. जीवन में आ रही बाधाएं और दिग्भ्रमित मन शांत होता है, तथा सही दिशा प्राप्त होती है. माना जाता है कि गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किए बिना ईश्वर की साधना भी अधूरी रहती है.

गुरु पूर्णिमा की पूजन विधि (Guru Purnima 2026 Pujan Vidhi)

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान-ध्यान के बाद विधि-विधान से पूजा का संकल्प लेना चाहिए. 

- इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और महर्षि वेद व्यास जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीप प्रज्वलित करें.

- यदि आपके गुरु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हैं, तो उनके चरण स्पर्श कर उन्हें रोली, अक्षत, चंदन और फूलों की माला पहनाएं.

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- इसके बाद गुरु को सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, फल, मिष्ठान और दक्षिणा भेंट करें और उनका आशीर्वाद लें.

- यदि आपके गुरु पास में न हों, तो उनकी तस्वीर के सामने ध्यान लगाकर मानसिक रूप से उनका पूजन करें और उनका ध्यान करें.

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