अपनी बुद्धि और वाणी को भला कौन प्रभावशाली और आकर्षक नहीं रखना चाहता. यदि आपको चीजें याद रखने या वाणी से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत महसूस होती है तो बुद्धि, विवेक और वाणी के कारक ग्रह भगवान गणपति की पूजा बहुत लाभ दे सकती है. पढ़ने वाले बच्चों को तो भगवान गणपति का आराधना प्रतिदिन करनी चाहिए. आइए 14 सितंबर को शुरू हो रहे गणेश महोत्सव से पहले आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.
बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क, संवाद, शिक्षा और व्यापार का कारक माना गया है. वहीं राहु का संबंध भ्रम, छल, असमंजस और गलत निर्णयों से जोड़ा जाता है. बुध को मजबूत रखने और राहु के प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए भगवान गणेश की आराधना को विशेष फलदायी है. प्रथम पूज्य भगवान गणपति बुद्धि और विवेक प्रदान करने वाले देवता हैं. उनकी नियमित पूजा व्यक्ति को विषम परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और भ्रम से बाहर निकलने में सहायता कर सकती है.
जिन लोगों की कुंडली में बुध कारक ग्रह होकर अस्त या पीड़ित अवस्था में हो, उन्हें गणपति आराधना को अपनी नियमित पूजा का हिस्सा बनाना चाहिए. विशेष रूप से वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वाले जातकों की कुंडली में यदि बुध किसी प्रकार से पीड़ित हो तो गणेश जी की उपासना अवस्य करें. ऐसे लोगों के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत और भगवान गणेश का विधिवत पूजन करना अनुकूल फलदायक होता है.
यदि बुध चौथे, छठे, अष्टम, नवम अथवा द्वादश भाव में स्थित हो और साथ ही वायु तत्व की राशियों (मिथुन, तुला या कुंभ) से संबंध रखता हो, तो भी गणपति पूजन अवश्य करना चाहिए. इन स्थितियों में व्यक्ति को निर्णय लेने, विचारों को व्यवस्थित करने अथवा अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने में कठिनाई महसूस हो सकती है. गणेश आराधना मन को एकाग्र करने और विवेकपूर्ण सोच विकसित करने में सहायक है.
राहु के प्रभाव में भी गणेश पूजा उपयोगी
राहु के प्रतिकूल प्रभावों की स्थिति में भी भगवान गणेश की उपासना का विशेष महत्व है. राहु को ज्योतिष में भ्रम और मायाजाल से जोड़ा जाता है. जबकि गणपति बुद्धि और विवेक के प्रतीक माने जाते हैं. इसलिए राहु की दशा या अंतर्दशा के दौरान गणेश जी की आराधना बहुत लाभकारी होती है. वाणी और संचार से जुड़े लोगों के लिए भी गणपति आराधना विशेष महत्व है. ऑनलाइन व्यापार, कम्युनिकेशन, शिक्षा, लेखन, अध्यापन या ऐसे कार्यों से जुड़े लोगों को नियमित रूप से भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करना चाहिए. इससे कार्य में एकाग्रता, संवाद में स्पष्टता और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाए रखने का आध्यात्मिक आधार मिलता है.
पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
गणपति पूजन शुरू करते समय पूजा स्थल पर कुमकुम और हल्दी की एक-एक बिंदी लगाना शुभ माना जाता है. इन्हें भगवान गणेश की पत्नियों रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद भगवान गणेश को विषम संख्या में दूर्वा अर्पित करनी चाहिए. 7, 9 या 11 दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है. प्रसाद के लिए बहुत अधिक व्यवस्था न हो पाए तो गुड़ और चने का भोग लगाया जा सकता है. मान्यता है कि यह भगवान गणपति को प्रिय है.
अंशु पारीक