400 साल पुराना रहस्यमयी मंदिर, जहां सूरज ढलते ही जंगल जाना है मना! सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म से क्या है कनेक्शन?

Maa Van devi Temple: बिहार की राजधानी पटना से लगभग 35 किलोमीटर दूर बिहटा के पास अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर सीमाओं के बीच स्थित मां वन देवी का मंदिर करीब 400 साल पुराना माना जाता है. घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर और इससे जुड़ी लोककथा से प्रेरित होकर बॉलीवुड में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर फिल्म 'The Vvaan: Force of the Forrest' बनाई गई है. जानें इस रहस्यमयी मंदिर का सच.

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बिहार वन देवी मंदिर (Instagram/@arunabhkumar) बिहार वन देवी मंदिर (Instagram/@arunabhkumar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

Maa Van devi Temple: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां सदियों से लोगों के बीच सुनाई जाती हैं. कुछ मंदिर अपनी भव्यता के लिए मशहूर हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी पहचान उनसे जुड़ी रहस्यमयी लोक कथाओं से है. बिहार में भी एक ऐसा ही मंदिर है, जिसे करीब 400 साल पुराना बताया गया है. घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर को मां वन देवी का स्थान माना जाता है.

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दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर से जुड़ी कहानी अब बॉलीवुड तक पहुंच चुकी है. सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म 'The Vvaan: Force of the Forrest' की कहानी का आधार इसी वन देवी मंदिर से जुड़ी कथा को बताया गया है. फिल्म मेकर्स के मुताबिक, मंदिर और उसके आस-पास प्रचलित किस्सों ने फिल्म की कहानी में अहम भूमिका निभाई है.

बिहार में कहां है मां वन देवी का मंदिर?

मां वन देवी का यह मंदिर बिहार के बिहटा के पास स्थित बताया जाता है. यह पटना से करीब 35 किलोमीटर पश्चिम की ओर है, जिसके पास अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों की सीमाओं भी स्थित है. मंदिर का वातावरण इसे और खास बनाता है. यह कोई ऐसा विशाल मंदिर नहीं है, जहां दूर से ही ऊंचे शिखर दिखाई दें. बल्कि जंगल और ग्रामीण परिवेश के बीच मौजूद यह छोटा-सा धार्मिक स्थल अपनी परंपराओं और इससे जुड़ी कहानियों के कारण लोगों का ध्यान खींचता है.

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यहां देवी की मूर्ति नहीं, पिंड के रूप में होती है पूजा

मां वन देवी मंदिर की सबसे खास बात यहां की पूजा पद्धति है. यहां देवी की पूजा किसी पारंपरिक प्रतिमा के रूप में नहीं, बल्कि पवित्र पत्थर की पिंड के रूप में की जाती है. स्थानीय आस्था में वन देवी को जंगल की रक्षक देवी माना जाता है. आसपास रहने वाले लोगों के बीच यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है कि देवी जंगल और वहां रहने वाले लोगों की रक्षा करती हैं. मंदिर की इसी अलग पहचान ने इसे दूसरे सामान्य मंदिरों से अलग बना दिया है.

सूर्य ढलने के बाद जंगल में जाने की मनाही क्यों?

मां वन देवी से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात इस जंगल को लेकर कही जाने वाली पुरानी मान्यता है. स्थानीय लोककथाओं के मुताबिक, कभी इस जंगल में ऐसी रहस्यमयी घटनाएं होती थीं, जिनसे आसपास के लोग परेशान रहते थे. इसी वजह से लोगों को सूर्यास्त के बाद जंगल की ओर जाने से रोकने की परंपरा बन गई. आज भी इस बात का जिक्र मंदिर से जुड़ी लोककथाओं में मिलता है. हालांकि, इन घटनाओं के बारे में कोआ वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. 

कौन थे विद्यानंद मिश्रा और क्या है मंदिर की स्थापना की कहानी?

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मंदिर की स्थापना को लेकर एक दिलचस्प लोककथा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि राघोपुर के रहने वाले विद्यानंद मिश्रा मां विंध्यवासिनी के भक्त थे. वे दूर विंध्याचल जाकर देवी की पूजा किया करते थे. उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए इतनी दूर जाकर पूजा करना मुश्किल होने लगा, लेकिन देवी के प्रति उनकी भक्ति कम नहीं हुई.

मान्यता के अनुसार, एक दिन देवी उनके सपने में प्रकट हुईं और उन्हें अपने पवित्र पिंड का एक हिस्सा लेकर स्थानीय जंगल में स्थापित करने का निर्देश दिया. इसके बाद उन्होंने अमहरा, राघोपुर और कंचनपुर की सीमा के पास इस पवित्र पिंड को स्थापित किया. बताया जाता है कि उस समय यह पूरा इलाका घने जंगल से घिरा हुआ था. इसी स्थान पर आगे चलकर वन देवी का मंदिर विकसित हुआ.

मंदिर की कहानी से कैसे जुड़ी सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म?

अब सवाल यह है कि बिहार के एक पुराने और स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध मंदिर की कहानी बॉलीवुड तक कैसे पहुंची? फिल्म The Vvaan: Force of the Forrest के लेखक और निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा तथा लेखक अरुणाभ कुमार ने मंदिर से जुड़ी लोककथा को फिल्म की कहानी के लिए प्रेरणा बताया है. अरुणाभ कुमार के मुताबिक, मंदिर से जुड़ी कहानी और जंगल से संबंधित रहस्यमयी परंपराओं ने उन्हें प्रभावित किया.

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यानी फिल्म की कहानी को सिर्फ काल्पनिक डर या रहस्य के तौर पर नहीं दिखाया जाएगा, बल्कि इसके पीछे बिहार की स्थानीय आस्था की छाप भी होगी. 

लोककथा और सिनेमा का दिलचस्प मेल

भारत में सदियों से लोककथाएं गांवों, जंगलों और धार्मिक स्थलों के साथ जुड़ी रही हैं. समय के साथ इनमें से कई कहानियां लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बन गईं. मां वन देवी मंदिर की कहानी भी इसी तरह की परंपरा से जुड़ी नजर आती है. इस मंदिर को लेकर कही जाने वाली बातें इतिहास के दस्तावेजों से ज्यादा स्थानीय मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक कथाओं पर आधारित हैं. यही वजह है कि मंदिर की वास्तविक ऐतिहासिकता और उससे जुड़ी लोककथाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है.

फिर भी, करीब 400 साल पुराने बताए जाने वाले इस वन मंदिर की कहानी और उससे जुड़ी रहस्यमयी परंपराओं ने अब एक बड़े दर्शक वर्ग का ध्यान खींच लिया है. इसकी वजह है सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म The Vvaan, जिसने बिहार की इस स्थानीय कथा को सिनेमाई दुनिया तक पहुंचा दिया है.

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