Hindu Dharam: भविष्यमालिका की ये भविष्यवाणियां हुई हैं सच! रहस्य जान चौंक जाएंगे आप

Hindu Dharam: ओडिशा के प्रसिद्ध संत अच्युतानंद दास द्वारा ताड़ के पत्तों पर लिखे ग्रंथ 'भविष्यमालिका' की चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है. जानें भविष्य मालिका की उन भविष्यवाणियों के बारे में जो सच साबित हुई हैं.

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भविष्यमालिका के संकेत (Photo: ITG) भविष्यमालिका के संकेत (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

Hindu Dharam: ओडिशा की धरती से जुड़ा एक ऐसा रहस्यमयी ग्रंथ, जिसकी चर्चा समय-समय पर होती रहती है, भविष्यमालिका. कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले लिखी गई इस भविष्यवाणी में आज के दौर की कई घटनाओं का जिक्र मिलता है. यही वजह है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ा बदलाव या संकट आता है, इस ग्रंथ का नाम फिर सुर्खियों में आ जाता है. लेकिन सवाल वही है कि क्या ये सच में भविष्य का सटीक आईना है या आस्था और मान्यताओं का एक गूढ़ मिश्रण? तो आइए भविष्यमालिका की उन भविष्यवाणियों के बारे में जानते हैं, जो आजतक काफी हद सच हुई हैं.

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जगन्नाथ मंदिर के कल्पवृक्ष से जुड़े संकेत

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक मान्यता भविष्य मालिका में भी मिलती है. कहा जाता है कि इसमें एक ऐसे संकेत का जिक्र है, जिसे कलियुग के अंतिम चरण की शुरुआत से जोड़ा जाता है. भविष्यमालिका के अनुसार, जब मंदिर परिसर का पवित्र कल्पवृक्ष (बरगद का पेड़) टूटे या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो, तो इसे बड़े बदलाव का संकेत माना जाएगा. साल 1999 में आए भयानक चक्रवात में इस प्राचीन पेड़ की कई शाखाएं टूट गई थीं. इसके बाद कुछ लोगों ने इसे भविष्यवाणी से जोड़कर एक चेतावनी के रूप में देखा था. हालांकि, इस पर राय अलग-अलग है. कुछ इसे आस्था मानते हैं, तो कुछ इसे प्राकृतिक घटना. 

मंदिर के शिखर से पत्थर गिरने की घटना

पुरी के जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक और दावा भविष्यमालिका से जोड़ा जाता है. इसमें कहा गया है कि मंदिर के ऊपरी हिस्से, खासकर नीला चक्र के आसपास से पत्थर गिरना किसी बड़े संकट का संकेत हो सकता है. बीते कुछ वर्षों में मंदिर के शिखर से पत्थर टूटकर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं ने देखरेख कर रहे विभागों, खासकर ASI, की चिंता बढ़ा दी थी. हालांकि, कुछ लोग इसे भविष्यवाणी से जोड़ते हैं, वहीं विशेषज्ञ इसे संरचना की पुरानी स्थिति और प्राकृतिक कारणों का असर मानते हैं.

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पतितपावन ध्वज से जुड़ा संकेत

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगे पवित्र ध्वज को लेकर भी भविष्यमालिका में एक खास बात कही जाती है. मान्यता है कि अगर इस झंडे में अचानक आग लग जाए, तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है. मार्च 2020 में, लॉकडाउन से ठीक पहले, एकादशी के दिन मंदिर के दीप से निकली चिंगारी के कारण ध्वज में आग लग गई थी. इसके अलावा, कुछ मौकों पर बिजली गिरने से भी झंडे के जलने की घटनाएं सामने आई हैं. इस तरह की घटनाओं को कुछ लोग भविष्यवाणी से जोड़ते हैं, जबकि अन्य इसे संयोग या प्राकृतिक कारण मानते हैं.

मंदिर के शिखर पर गिद्ध दिखने की चर्चा

पुरी के जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक और बात भविष्यमालिका से जोड़ी जाती है. कहा जाता है कि आम तौर पर मंदिर के नीला चक्र पर पक्षी नहीं बैठते, लेकिन भविष्य में वहां मांसाहारी पक्षी दिखने को मिल सकते हैं. पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया और खबरों में ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें मंदिर के ऊपरी हिस्से पर गिद्ध बैठे नजर आए. इसे कुछ लोग भविष्यवाणी से जोड़ते हैं, जबकि कई लोग इसे सामान्य घटना या संयोग मानते हैं.

खतरनाक बीमारियों को लेकर संकेत

भविष्यमालिका में एक जगह यह भी कहा गया है कि समय के साथ ऐसी गंभीर बीमारियां फैलेंगी, जिनका इलाज ढूंढना मुश्किल होगा. अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामले बढ़ने की बात भी इसमें बताई गई है. साल 2020 में आई कोरोना महामारी (COVID-19) ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया. इसके बाद अलग-अलग वायरस के प्रकोप भी देखने को मिले. इसी वजह से कुछ लोग इन घटनाओं को भविष्यवाणी से जोड़ते हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों का परिणाम मानते हैं.

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रिश्तों में दूरी और मूल्यों पर असर

भविष्यमालिका में समाज के बदलते स्वभाव का भी जिक्र मिलता है. इसमें कहा गया है कि समय के साथ लोगों में गुस्सा, स्वार्थ और भौतिक इच्छाएं बढ़ेंगी, जिससे रिश्तों में दूरियां आ सकती हैं. वर्तमान समय में पारिवारिक विवाद, बुजुर्गों का अकेलापन और रिश्तों में तनाव जैसी बातें अक्सर देखने को मिलती हैं. कई लोग इसे उसी संकेत से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे बदलती जीवनशैली और सोच का असर मानते हैं.

क्या है भविष्यमालिका?

भविष्यमालिका ओडिशा के प्रसिद्ध संत अच्युतानंद दास और उनके पंचसखा संतों द्वारा रचित मानी जाती है. इसे ताड़ के पत्तों पर लगभग 500-600 साल पहले लिखा गया था. इस ग्रंथ में कथित तौर पर भविष्य में होने वाली घटनाओं, सामाजिक बदलावों, प्राकृतिक आपदाओं और धार्मिक स्थितियों का वर्णन मिलता है. पंचसखा- जगन्नाथ दास, बलराम दास, यशोवंत दास और अनंत दास, इन सभी संतों को उस समय का महान आध्यात्मिक समूह माना जाता है, जिन्होंने भक्ति और ज्ञान के जरिए समाज को दिशा दी.

क्यों फिर चर्चा में है यह ग्रंथ?

हाल के वर्षों में जब दुनिया ने महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक उथल-पुथल जैसे हालात देखे, तो कई लोगों ने भविष्यमालिका की भविष्यवाणियों से इन घटनाओं को जोड़ना शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर भी इस ग्रंथ के अंश तेजी से वायरल होते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि इसमें आधुनिक समय की कई घटनाओं का पहले ही उल्लेख किया गया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आसान नहीं है, लेकिन जिज्ञासा और विश्वास के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.

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