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Nag Panchami 2026: देसी अखाड़े में विदेशी पहलवानों का स्वैग! नागपंचमी पर दिखाई बाहुबली सी ताकत

रोशन जायसवाल
  • वाराणसी,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST
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आज नाग पंचमी है. देशभर में इस त्योहार के कई अलग रंग दिखाई देते हैं. आस्था के इस पर्व का एक अनोखा रंग भगवान शिव की नगरी काशी में भी दिखाई देता है, जहां सात समंदर पार से विदेशी पहलवान अपनी शारीरिक क्षमताओं को परखने के लिए आते हैं. आपको जानकर भले ही हैरानी होगी, लेकिन नागपंचमी पर काशी के अखाड़ों में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. जहां सैकड़ों वर्षों से नाग पंचमी पर कुश्ती, जोड़ी, गदा और डंबल के जरिए पहलवान अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हैं.

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खास बात यह है कि अखाड़ों में विदेशी मेहमान भी आकर जोर-आजमाइश करते हैं. स्पेन के खेल 'मेसफ्लो' के खिलाड़ी सेंटियागो जिन्हें सेंटी या शांति के नाम से भी जाना जाता है, यहां अपनी ताकत का नमूना पेश कर रहे हैं. वहीं, नीदरलैंड के हर्बर्ट ने जब अखाड़े में जोड़ी, गदा और डंबल फेरना शुरू किया तो वहां मौजूद लोग हैरान रह गए.

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काशी को यूं ही अद्भुत नगरी नहीं कहा जाता है. जो भी यहां आता है, बस यहीं का होकर रह जाता है. स्पेनिश खेल 'मेसफ्लो' के खिलाड़ी सेंटियागो और नीदरलैंड से आए उनके साथी हर्बर्ट के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. हर साल की तरह इस बार भी ये नाग पंचमी पर काशी पहुंचे और अखाड़ों में गदा और डंबल फेरकर अपना दम दिखाया. विदेशी मेहमानों द्वारा देसी अखाड़ों में जोर-आजमाइश स्थानीय पहलवानों और लोगों में किसी कौतूहल से कम नहीं था.

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सेंटियागो ने बताया कि वह अपने देश में मेसफ्लो के खिलाड़ी और ट्रेनर हैं. यह खेल भारतीय अखाड़ों के जोड़ी और गदा से मिलता-जुलता है. वह इसी खेल में खुद को निखारने के लिए दूसरी बार काशी आए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें काशी के पहलवानों से काफी प्रेरणा भी मिलती है.

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उन्होंने यह भी कहा कि जो आनंद देसी अखाड़ों में है, वो वेस्टर्न कल्चर के जिम में कहां है. अखाड़ों जैसी प्राकृतिक छांव और भाईचारे का अनुभव और कहीं नहीं मिल सकता. नीदरलैंड से आने वाले उनके साथी हर्बर्ट एगबर्ट ने बताया कि वह साल 2017 से नाग पंचमी के पर्व पर काशी आ रहे हैं और अपने ट्रेनर सेंटियागो से सीख रहे है.

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भारतीय पारंपरिक खेल के प्रोत्साहक ज्ञान शंकुल सिंह ने बताया कि कभी काशी में 105 अखाड़े हुआ करते थे. लेकिन अब सिर्फ 29 ही बचे हैं. नाग पंचमी के दिन यहां पहलवान अपनी प्रतिभा दिखाते हैं. इसे देखने और शामिल होने यहां विदेशी भी आते हैं. उन्होंने बताया कि नाग पंचमी से शुरू होकर 2-3 महीने तक दंगल चलता रहता है.

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