हनुमान जी ने कैसे लिया पंचमुखी अवतार... रामकथा के इस प्रसंग का देवी से क्या है कनेक्शन

पंचमुखी हनुमान भगवान हनुमान का दुर्लभ और शक्तिशाली स्वरूप है, जिसमें उनके पांच मुख होते हैं. यह रूप महिरावण और अहिरावण का वध करने के लिए प्रकट हुआ था. पंचमुखी हनुमान के पांच मुख भक्ति, शक्ति, भय नाश, धन-समृद्धि और विद्या के प्रतीक हैं.

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पंचमुखी हनुमान की कथा कृत्तिवास रामायण में मिलती है पंचमुखी हनुमान की कथा कृत्तिवास रामायण में मिलती है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:18 AM IST

चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम का जन्म हुआ था. भगवान विष्णु का प्रमुख अवतार होने की मान्यता के कारण श्रीराम को भगवान ही माना जाता है. बात श्रीराम की होती है तो उनके भक्त और उन्हें अपने हृदय में बसाने वाले हनुमान जी का भी जिक्र होता है. सामान्य तौर पर हम हनुमान जी को एक मुख वाला ही देखते हैं, लेकिन हनुमान जी का भी एक विराट स्वरूप है, जिसमें वह पंचमुखी हनुमान बन जाते हैं. 

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पंचमुखी हनुमान का रूप बहुत दुर्लभ, शक्तिशाली और तंत्र-शास्त्र में सर्वोच्च माना जाता है. यह रूप तब प्रकट हुआ जब हनुमान जी ने अहिरावण और महि रावण (रावण के ही खानदान के असुर) का वध करने के लिए पाताल लोक पहुंचे थे.

पंचमुखी हनुमान के पांच मुख कौन-कौन से हैं?

  1. 1. पूर्व दिशा – श्री हनुमान मुख (सामने)- भक्ति, शक्ति और राम-भक्ति का प्रतीक  
  2. 2. दक्षिण दिशा – श्री नरसिंह मुख- सभी प्रकार के भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का नाश  
  3. 3. पश्चिम दिशा – श्री गरुड़ मुख- विष, तंत्र-बाधा, जादू-टोना नष्ट करने वाला  
  4. 4. उत्तर दिशा – श्री वराह मुख - धन, समृद्धि और लक्ष्मी प्राप्ति  
  5. 5. ऊपर आकाश की ओर – श्री हयग्रीव मुख- विद्या, बुद्धि, ज्ञान और उच्च चेतना का दाता

इन पांचों मुखों के कारण इनका नाम पंचमुखी हनुमान पड़ा.

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कृत्तिवास रामायण में मिलती है कथा
पंचमुखी हनुमान जी की कथा विशेष रूप से कृत्तिवास रामायण और लोक परंपराओं में मिलती है. लंका युद्ध के दौरान, महिरावण और अहिरावण जो पाताल लोक के राजा और देवी निकुंभला का उपासक थे, छल से श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण करके उन्हें पाताल ले गया. महिरावण उन्हें अपनी देवी महामाया निकुंभला को बलि चढ़ाना चाहता था. जब हनुमान जी को यह पता चला, तो वह उन्हें बचाने के लिए पाताल लोक पहुंचे. उन्होंने देखा कि वहां महाकाली का एक विशाल मंदिर है.

हनुमान जी ने देवी महाकाली को पुकारा कि वह उन्हें श्री राम और लक्ष्मण को बचाने की अनुमति दें. महाकाली हंसने लगीं और बोलीं कि हनुमान राम और लक्ष्मण को कोई बचाए ऐसा कौन है. वह तो खुद ही सारी सृष्टि को बचाते-बिगाड़ते हैं. लेकिन, ये युद्ध तो आपकी शक्ति को जगाने के लिए है. तब देवी कहती हैं कि ध्यान से देखिए हनुमान, आप मेरे ही स्वरूप हैं.

कैसे लिया पंचमुखी अवतार
देवी के ऐसा कहते ही, हनुमान जी ने देवी का रूप आत्मसात कर लिया और खुद उनके स्थान पर स्थापित हो गए.  इसके बाद, उन्होंने पंचमुखी हनुमान का भयंकर रूप धारण किया (जिसमें पांच दिशाओं में पांच मुख थे, स्वयं हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव. उन्होंने पांचों दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों को एक साथ बुझाकर महिरावण का वध किया और राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया.

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​माना जाता है कि इस घटना के बाद, देवी महाकाली (जो दुर्गा का ही एक रूप हैं) हनुमान जी की भक्ति और वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्हें अपना द्वारपाल या सेवक नियुक्त किया. यही कारण है कि आज भी कई शक्तिपीठों और देवी मंदिरों के बाहर हनुमान जी और भैरव बाबा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं.

पंचमुखी हनुमान जी की पूजा के लाभ 

  • - भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, ऊपरी बाधा नष्ट  
  • - कोर्ट-कचहरी, शत्रु पीड़ा, व्यापार में बाधा दूर  
  • - कालसर्प दोष, पितृ दोष, नजर दोष तुरंत शांत  
  • - घर में धन की कमी हो तो लाभ होगा  
  • - विद्या और बुद्धि प्राप्ति के लिए सबसे उत्तम

पूजा का सरल तरीका

  1. 1. मंगलवार या शनिवार को पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति/तस्वीर घर में स्थापित करें.  
  2. 2. पंचमुखी हनुमान कवच या  पंचमुखी हनुमान स्तोत्र का पाठ करें.  
  3. 3. चमेली के तेल का दीपक जलाएं.  
  4. 4. लाल चंदन, लाल पुष्प, सिंदूर जरूर चढ़ाएं 
  5. 5. हनुमान चालीसा के बाद यह मंत्र 11 बार बोलें:  

   ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।  
   
यह पंचमुखी हनुमान का बीज मंत्र है जो बहुत चमत्कारी माना जाता है.

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