राजस्थान के धौलपुर जिले की 16 वर्षीय खिलाड़ी वान्या बोहरा ने आइस स्केटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वान्या का चयन आगामी एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ है. इस सफलता के साथ उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि धौलपुर और पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया है.
वान्या बोहरा धौलपुर के प्रमुख समाजसेवी शैलेंद्र सिंह बोहरा की पौत्री और प्रशांत बोहरा की बेटी हैं. वह जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ रही हैं. बचपन से ही उन्हें आइस स्केटिंग का शौक था. इसी रुचि को आगे बढ़ाने में पिता प्रशांत बोहरा, मां श्वेता बोहरा और भाई वेदांत बोहरा ने लगातार उनका साथ दिया.
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परिवार के प्रोत्साहन और वान्या की मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने आइस स्केटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की. उनकी उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि के बाद धौलपुर के खेल प्रेमियों और जिलेवासियों में खुशी की लहर है. लोग वान्या को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं.
रोलर स्केटिंग में भी दिखा चुकी हैं हुनर
वान्या का खेलों से जुड़ाव सिर्फ आइस स्केटिंग तक सीमित नहीं रहा है. इससे पहले वह रोलर स्केटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं. अब आइस स्केटिंग में भी राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के तौर पर पहचान बनाने के बाद उन्होंने भारतीय टीम में जगह हासिल कर अपने खेल करियर में एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है.
इस सफलता के पीछे वान्या की वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ उनके कोच हर्ष खत्री का भी अहम योगदान रहा है. लगातार अभ्यास और बेहतर प्रदर्शन के जरिए उन्होंने खुद को मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया. परिवार के सहयोग और कोच के मार्गदर्शन ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
अब वान्या की नजरें एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करने पर हैं. वह टीम इंडिया की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरेंगी. धौलपुर की इस बेटी से जिलेवासियों को उम्मीद है कि वह अपने प्रदर्शन से भारत का मान बढ़ाने के साथ अपने शहर का नाम भी दुनिया के खेल मानचित्र पर और मजबूत करेंगी.
राजनीति और समाजसेवा से खेलों तक बोहरा परिवार
वान्या की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बोहरा परिवार की पहचान धौलपुर में राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र से रही है. अब परिवार की नई पीढ़ी खेलों में भी उपलब्धियों के नए अध्याय लिख रही है. वान्या के दादाजी शैलेंद्र बोहरा वर्तमान में जिला हॉकी संघ के जिला अध्यक्ष हैं. परिवार में खेलों को बढ़ावा देने की परंपरा ने भी वान्या को आगे बढ़ने के लिए माहौल दिया.
वान्या की कहानी यह संदेश देती है कि परिवार का साथ, सही मार्गदर्शन और खिलाड़ी का समर्पण हो तो छोटे शहरों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं. धौलपुर जैसी जगह से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. उनकी सफलता खास तौर पर उन युवा खिलाड़ियों और बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं.
एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में वान्या के चयन की खबर सामने आते ही खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और जिलेवासियों ने उन्हें बधाई दी. सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. अब उम्मीद की जा रही है कि एशियन गेम्स में वान्या शानदार प्रदर्शन कर भारत के साथ-साथ धौलपुर का नाम भी अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर रोशन करेंगी.
उमेश मिश्रा