डीके शिवकुमार की शपथ सिद्धारमैया क्या 'येदियुरप्पा' बनकर देख रहे थे?

सिद्धारमैया को दिल्ली शिफ्ट करने की कोशिश भी बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा जैसी ही लगती है. जब क्षेत्रीय जनाधार वाले नेता राष्ट्रीय ढांचे में जगह पाते हैं, तब यह देखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वास्तविक निर्णय प्रक्रिया में कितना महत्व मिलता है - कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर यही देखने को मिल रहा है.

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कर्नाटक के कांग्रेस नेता सिद्धारमैया और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा. (Photo: ITG/File) कर्नाटक के कांग्रेस नेता सिद्धारमैया और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा. (Photo: ITG/File)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

डीके शिवकुमार ने शपथ लेने से पहले कर्नाटक के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों एचडी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री भी), बीएस येदियुरप्पा और सिद्धारमैया से मुलाकात की है. डीके शिवकुमार ने तीनों नेताओं के घर जाकर उनसे मुलाकात की और आशीर्वाद लिया. बाद में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की तरह हाथ में संविधान की कॉपी लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 

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डीके शिवकुमार को सिद्धारमैया के कुर्सी छोड़ने के बाद कांग्रेस ने कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया है. सिद्धारमैया को अब कांग्रेस की कार्यसमिति (CWC) का स्थायी सदस्य बना दिया गया है. कांग्रेस आलाकमान का यह फैसला बीजेपी नेतृत्व के उस फैसले जैसा लगता है, जिसमें बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाकर बीजेपी के संसदीय बोर्ड में पहुंचा दिया गया. जैसे संसदीय बोर्ड बीजेपी में फैसले लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है, कांग्रेस में CWC की भी वही हैसियत है. 

सवाल यह है कि क्या सिद्धारमैया को भी कांग्रेस येदियुरप्पा जैसी ही अहमियत देगी - क्योंकि कर्नाटक में दोनों ही नेताओं का मिलता जुलता ही राजनीतिक दबदबा है.  

सिद्धारमैया और येदियुरप्पा

सिद्धारमैया और येदियुरप्पा में कॉमन बात यह भी है कि दोनों ही कर्नाटक नहीं छोड़ना चाहते थे, लेकिन दिल्ली से दोनों के लिए एक जैसे इंतजाम किए गए. सिद्धारमैया अगस्त में 78 साल के होने जा रहे हैं. और, 2021 में जब येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, तो उनकी भी उम्र 78 साल ही थी. करीब साल भर बाद 2022 में येदियुरप्पा को बीजेपी संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था.

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हाल ही में बीजेपी ने चित्रदुर्ग में येदियुरप्पा के सार्वजनिक जीवन के 50 साल पूरे होने पर बड़ा आयोजन किया था, जिसमें केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथग्रहण समारोह के बाद सीधे पहुंचे थे. अमित शाह ने दिल खोलकर येदियुरप्पा की तारीफ की. 

अमित शाह ने येदियुरप्पा से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया, 'मैं आज एक बात विशेष रूप से बताना चाहूंगा. जब मैं संगोली रायन्ना को श्रद्धांजलि देने उस स्थान पर गया, जहां उन्हें फांसी दी गई थी, तब दूर से देखकर लगा कि शायद इस स्थान की किसी ने चिंता नहीं की है. इतने महान देशभक्त के शहादत स्थल की उपेक्षा हुई होगी... मगर जब मैं अंदर गया, तो वहां एक छोटा-सा बगीचा, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, बैठने के लिए बेंचें और संगोली रायन्ना का इतिहास लिखा हुआ दिखाई दिया... तब मैंने पूछा कि यह कार्य किस सज्जन ने कराया है? उस समय येदियुरप्पा जी मेरे साथ खड़े थे... उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, आपके साथ जो खड़े हैं, उसी येदियुरप्पा जी ने यह कार्य किया है.'

कर्नाटक में अगला चुनाव 2028 में होना है, और बीजेपी के लिए येदियुरप्पा की अहमियत जरा भी कम नहीं हुई है. हो भी कैसे, दक्षिण भारत में भी कमल खिले, यह सुनिश्चित करने वाले भी तो येदियुरप्पा ही हैं. भले ही बीजेपी के ऑपरेशन लोटस के लिए येदियुरप्पा का नाम लिया जाता हो, लेकिन सत्ता की राजनीति की जो तरकीब येदियुरप्पा ने अपने दौर में निकाली, आज भी बीजेपी की राजनीति में येदियुरप्पा का वह प्रयोग ब्रह्मास्त्र साबित होता है. 

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सिद्धारमैया बोल चुके हैं कि दिल्ली की राजनीति में उनकी बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं है. राज्यसभा भेजे जाने के राहुल गांधी के ऑफर पर सिद्धारमैया ने कहा था कि उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया है. फिर भी उनको कांग्रेस की कार्यसमिति में शामिल किया गया है.  

क्या सिद्धारमैया को लेकर भी कांग्रेस नेतृत्व ने वैसा ही कुछ प्लान कर रखा है जैसा बीजेपी नेतृत्व कर रहा है - क्या सिद्धारमैया के लिए भी कर्नाटक में कांग्रेस की तरफ से वैसे ही जश्न होंगे जैसे बीजेपी येदियुरप्पा के लिए कर रही है?

सिद्धारमैया के लिए दिल्ली में क्या क्या है?

सिद्धारमैया को CWC में शामिल किया जाना यूं तो नहीं लगता. निश्चित तौर पर यह कदम सिद्धारमैया को कर्नाटक से दिल्ली लाए जाने के क्रम में उठाया गया एक कदम है. साथ ही, सिद्धारमैया को देश की राजनीति में बड़ी भूमिका दिए जाने की तैयारी का संकेत माना जा सकता है. 

कांग्रेस के एक सीनियर नेता के मुताबिक कर्नाटक से राज्यसभा की 3 सीटों के लिए 80 से ज्यादा दावेदार हैं. सिद्धारमैया का भले ही अभी अनिश्चित हो, लेकिन कांग्रेस से एक नाम तो अभी से पक्का माना जा रहा है. वह नाम है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का. बाकी बची दो सीटों के लिए वाईएस शर्मिला, सिद्धारमैया, केजे जॉर्ज, बीवी श्रीनिवास और मंसूर अली खान जैसे नाम संभावितों की सूची में शामिल माने जा रहे हैं. 

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वैसे सिद्धारमैया जब राहुल गांधी की बात मानकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं, तो क्या नया ऑफर ठुकरा पाएंगे? अगर राहुल गांधी थोड़ा जोर देकर बोल दें, तो क्या सिद्धारमैया राज्यसभा जाने से इनकार कर पाएंगे?

मल्लिकार्जुन खड़गे जुलाई में 84 साल के हो जाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे अपना काम बड़े शौक से कर रहे हैं. पूरी तरह एक्टिव हैं, लेकिन कई बार चढ़ते उतरते समय लोगों की मदद भी लेनी पड़ती है. फिलहाल राज्यसभा में वो विपक्ष के नेता भी हैं. 

राहुल गांधी के मन में सिद्धारमैया को लेकर क्या क्या चल रहा है, सामने तो नहीं आया है लेकिन संभावनाएं काफी नजर आ रही हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे से सिद्धारमैया करीब 6 साल छोटे हैं. और, कांग्रेस का सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा हैं, जो कर्नाटक में AHINDA वाली राजनीति करते रहे हैं, जो यूपी के पीडीए फैक्टर से मिलता जुलता ही है. राहुल गांधी का हाल फिलहाल सबसे ज्यादा जोर तो ओबीसी पॉलिटिक्स पर ही है. 

और दलित कांग्रेस अध्यक्ष के बाद ओबीसी कांग्रेस अध्यक्ष का भी तो राहुल गांधी का प्लान हो ही सकता है. राहुल गांधी का दक्षिण भारत की राजनीति पर जोर भी तो 2029 के आम चुनाव के लिए ही है.

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