वैदिक घड़ी... उज्जैन में इस दिन होगा लोकार्पण, वैदिक काल गणना को वापस लाने की तैयारी!

उज्जैन में एक मार्च को 85 फीट ऊंचे टावर पर विश्व की एकमात्र और पहली वैदिक घड़ी लगने जा रही है. यह दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वाच होगी, जिसमें इंडियन स्टैंडर्ड टाइम और ग्रीनविच मीन टाइम के साथ पंचांग और मुहूर्त की जानकारी मिलेगी. इसके ग्राफिक्स भोपाल की एक संस्था ने तैयार किए हैं.

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विश्व की पहली वैदिक घड़ी! विश्व की पहली वैदिक घड़ी!

संदीप कुलश्रेष्ठ

  • उज्जैन,
  • 23 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक मार्च को 85 फीट ऊंचे टावर पर विश्व की एकमात्र और पहली वैदिक घड़ी लगने जा रही है. खास बात यह कि इस वैदिक घड़ी के एप्प की भी लॉन्चिंग इस दिन होनी है. यह दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वाच होगी, जिसमें इंडियन स्टैंडर्ड टाइम और ग्रीनविच मीन टाइम के साथ पंचांग और मुहूर्त की जानकारी मिलेगी.

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इसके ग्राफिक्स भोपाल की एक संस्था ने तैयार किए हैं. इसमें 12 ज्योतिर्लिंग, श्री राम मंदिर और कैलाश मानसरोवर को दर्शाया गया है. इसकी एप्प आरोह श्रीवास्तव ने तैयार की है. यह एप्प और घड़ी सूर्योदय-सूर्यास्त, सूर्य-चन्द्र ग्रहण, पंचाग, मौसम जे जुड़ी जानकारी और कब कैसा रहेगा यह भी बताएगी.

खगोलीय घटनाओं का दिखाएगा नजारा

घड़ी में घंटे, मिनट और सेकंड वाली सुई भी रहेगी. टावर पर एक टेलिस्कोप होगा, जो खगोलीय घटनाओं का नजारा दिखाएगा. इंटरनेट और जीपीएस से जुड़ी इस घड़ी का कहीं भी उपयोग किया जा सकेगा.

शोध पीठ संस्था के निर्देशक ने कही ये बात

वहीं, शोध पीठ संस्था के निर्देशक श्रीराम तिवारी विक्रमादित्य ने बताया कि उज्जैन का ये सौभाग्य है कि ये कालजयी नगरी है, तो सृष्टि के आरंभ के साथ महाकाल की कृपा के कारण उज्जैन की स्थापना हुई. काल के प्रभाव में जो हमारी वैदिक काल गणना विलुप्त हो गई थी, उसको दोबारा प्रारंभ करने का सौभाग्य हमे मिल रहा है.

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वैदिक परंपरा के अनुसार दर्शाने की कोशिश

संस्था के निर्देशक ने आगे कहा, आरोह श्रीवास्तव एक युवा है और वे मर्चेंट नेवी में वे कार्यरत थे. उन्होंने इस वैदिक घड़ी के एप्प को तैयार करने में पूरा समय दिया है. वैदिक घड़ी में हमने सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त और कुल 24 घण्टे का जो समय है उसको वैदिक परंपरा अनुसार हमने दर्शाने की कोशिश की है. 

भोपाल की संस्था ने तैयार किए ग्राफिक्स

भोपाल की एक संस्था ने इसके ग्राफिक्स तैयार किए हैं. इसमें 12 ज्योतिर्लिंगं के दृश्य, श्री राम मंदिर का दृश्य और कैलाश मानसरोवर दृश्य है. ग्राफिक्स के माध्यम से इन सभी को दर्शाया गया है. साथ ही इस काम को पूरा करने में विक्रमादित्य शोध पीठ संस्थान ने पूरी कोशिश की है.

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