अगले 72 घंटे बेहद भारी! मध्य प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD की चेतावनी

MP में मानसून फिर से सक्रिय है, लेकिन बारिश का वितरण अब भी असमान बना हुआ है. 1 जून से 23 अगस्त तक मध्य प्रदेश में कुल वर्षा दीर्घकालीन औसत से करीब 11% कम रही है. पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी लगभग 8% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में करीब 14% है, इसलिए आने वाले 3 दिन राहत और चुनौती, दोनों साथ लेकर आ सकते हैं.

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जबलपुर में बरगी बांध के गेट खुलने के बाद लोग जमा हुए.(Photo:PTI) जबलपुर में बरगी बांध के गेट खुलने के बाद लोग जमा हुए.(Photo:PTI)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:55 PM IST

मध्य प्रदेश में 24 अगस्त को पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश और 25-26 अगस्त को पूरे प्रदेश में मानसूनी गतिविधि और तेज होने की चेतावनी है. मौसम विभाग के ताजा अलर्ट ने यही संकेत दिया है. 24 अगस्त से 26 अगस्त के बीच प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं दिक्कत बढ़ा सकती हैं.

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सोमवार यानी 24 अगस्त को डिंडोरी और बालाघाट में अति भारी बारिश की आशंका है. वहीं विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, सीधी, रीवा, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, सागर, छतरपुर और पन्ना जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है. भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, श्योपुर और आसपास के कई इलाकों में भी गरज-चमक के साथ तेज हवा की स्थिति बन सकती है.

25 अगस्त को बारिश का दायरा और बढ़ने का अनुमान है. पूर्वी और पश्चिमी, दोनों संभागों में अति भारी वर्षा की चेतावनी है. नर्मदापुरम, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, दमोह, सागर, रायसेन, बैतूल, सीधी, शहडोल, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और पांढुर्णा में असर ज्यादा दिख सकता है.

26 अगस्त को भी राहत के पूरे आसार नहीं हैं. पूर्वी मध्य प्रदेश में अति भारी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश जारी रह सकती है. 27 अगस्त तक कुछ हिस्सों में असर बना रह सकता है, जबकि 28 अगस्त से व्यापक चेतावनी में कमी के संकेत हैं.

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23 अगस्त की सुबह तक कई संभागों में बारिश और गरज-चमक दर्ज हुई, लेकिन अब असली परीक्षा अगले 3 दिन की है.

इस सक्रिय दौर से जहां सूखते इलाकों को राहत मिल सकती है, वहीं जलभराव, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और बिजली गिरने का खतरा भी साथ है, इसलिए 24 से 26 अगस्त तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव होगी.

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