MP में 'जिंदा' लोगों को मार डाला! पंचायत सचिव ने जारी किए 3 मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन रुकी तो खुला सरकारी लापरवाही का बड़ा खेल

Fake Death Certificate Case: MP के छतरपुर में जिंदा लोगों को मृत घोषित करने वाले पंचायत सचिव पर गाज गिर गई. विधवा पेंशन रुकी तो इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था. जानें क्या है सरपंच पर लग रहे आरोपों का पूरा सच...

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'जिंदा' लोगों को मारने की साजिश क्या सरपंच के दबाव में रची गई? (Photo: Representational) 'जिंदा' लोगों को मारने की साजिश क्या सरपंच के दबाव में रची गई? (Photo: Representational)

aajtak.in

  • छतरपुर,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:01 PM IST

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक पंचायत सचिव को 3 जिंदा लोगों के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. जहां स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सचिव ने शायद किसी दबाव में आकर ऐसा किया हो, वहीं अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह गलती शायद कंप्यूटर चलाने की जानकारी न होने के कारण हुई हो.

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सचिव अमर सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई 17 अप्रैल को रमाबाई रायकवार, गिरजा विश्वकर्मा और कल्लू अहिरवार की ओर से दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद की गई. इन लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था और उनके मृत्यु प्रमाण पत्र गलत तरीके से बना दिए गए थे.

पेंशन रुकी तो पता चला- 'हम तो मर चुके हैं'

अपनी शिकायत में रायकवार और विश्वकर्मा ने कहा कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के बाद उनकी विधवा पेंशन रोक दी गई थी. अहिरवार ने दावा किया कि वह दलित कल्याण योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों का फायदा नहीं उठा पा रहे थे, क्योंकि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था.

बदला या तकनीकी गलती?

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इन तीनों लोगों ने चुनाव के दौरान चंद्रापुरा के सरपंच के खिलाफ काम किया था, और हो सकता है कि सरपंच ने बदला लेने के लिए सचिव पर दबाव डाला हो.

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CEO की कार्रवाई और सचिव का निलंबन

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नमः शिवाय अरजरिया ने चंद्रापुरा ग्राम पंचायत के सचिव अमर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. हालांकि, अरजरिया ने कहा कि वह इस शिकायत पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि सचिव को कंप्यूटर चलाने की ज्यादा जानकारी नहीं थी और इसलिए शायद यह गलती हो गई हो.

CEO ने कहा कि शुरुआती तौर पर यह पाया गया कि यह कृत्य 'मध्य प्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1996' के तहत एक गंभीर कदाचार (गलत आचरण) है. निलंबन की अवधि के दौरान अमर सिंह को जनपद पंचायत गौरिहार कार्यालय से अटैच किया जाएगा और उन्हें जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा.

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