कहते हैं कि प्यार और वफादारी की कोई भाषा नहीं होती. यह रिश्ता शब्दों से नहीं, बल्कि साथ निभाने से बनता है. ऐसी ही एक कहानी मध्य प्रदेश के बैतूल से सामने आई है, जिसने हर सुनने वाले की आंखें नम कर दीं. यहां एक पालतू डॉगी ने अपने मालिक का साथ सिर्फ जिंदगी भर ही नहीं निभाया, बल्कि उनकी अंतिम यात्रा तक भी नहीं छोड़ा.
दरअसल, यह कहानी है बैतूल निवासी स्वर्गीय प्रदीप जैन और उनके पालतू डॉगी 'डुग्गू' की है. दोनों का रिश्ता इतना गहरा था कि मालिक की मौत के बाद डुग्गू भी ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह सका. अब दोनों को एक साथ श्रद्धांजलि देकर परिवार और शहर के लोगों ने इस अनोखे रिश्ते को याद किया.
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रविवार को बैतूल की राधाकृष्ण धर्मशाला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का माहौल बेहद भावुक था. यहां स्वर्गीय प्रदीप जैन के साथ उनके सबसे वफादार साथी डुग्गू की तस्वीर भी रखी गई. परिवार, रिश्तेदार, मित्र और समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और दोनों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी.
15 साल तक साथ निभाया, अंतिम यात्रा में भी नहीं छोड़ा मालिक का साथ
परिजनों के मुताबिक, डुग्गू पिछले करीब 15 वर्षों से प्रदीप जैन के साथ था. वह सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह रहता था. उसकी दिनचर्या भी अपने मालिक के इर्द-गिर्द ही घूमती थी.
बताया गया कि प्रदीप जैन का भोपाल एम्स में इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. जब उनका पार्थिव शरीर बैतूल लाया गया और अगले दिन अंतिम यात्रा निकली, तब डुग्गू भी अर्थी के पीछे-पीछे चलता रहा.
परिजनों का कहना है कि कुछ दूर चलने के बाद अचानक डुग्गू की तबीयत बिगड़ गई और उसने भी अंतिम सांस ले ली. इस घटना ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया. बाद में प्रदीप जैन और डुग्गू का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया.
'डुग्गू जानवर नहीं, परिवार का सदस्य था'
श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने कहा कि डुग्गू केवल एक पालतू डॉगी नहीं था. वह परिवार का अभिन्न हिस्सा था. उसने जीवनभर अपने मालिक का साथ निभाया और आखिरी विदाई के समय भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा.
परिजन दिलीप जैन ने बताया कि उनके बड़े भाई प्रदीप जैन ने करीब 15 साल पहले डुग्गू को पाला था. दोनों के बीच बेहद गहरा लगाव था. उन्होंने कहा कि भाई के निधन के दौरान अंतिम यात्रा में ही डुग्गू ने भी दम तोड़ दिया. इसलिए आज श्रद्धांजलि सभा में दोनों को एक साथ याद किया गया.
रिश्तेदार दीपाली जैन ने बताया कि डुग्गू को अपने मामा प्रदीप जैन से बेहद लगाव था. वह उनके साथ ही खाना खाता, उनके साथ ही रहता और हर जगह उनके पीछे-पीछे चलता था. उनके लिए डुग्गू किसी जानवर की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा था.
वफादारी और निस्वार्थ प्रेम की मिसाल बना यह रिश्ता
श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने इंसान और पालतू के इस रिश्ते को निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और वफादारी की अनोखी मिसाल बताया. दोनों की तस्वीरों को एक साथ देखकर कई लोगों की आंखें भर आईं. कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह भावुक नजर आया.
यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि सच्चा अपनापन केवल इंसानों तक सीमित नहीं होता. कई बार बेजुबान भी ऐसा साथ निभा जाते हैं, जिसकी मिसाल देना आसान नहीं होता. डुग्गू ने अपने मालिक के प्रति जिस वफादारी का परिचय दिया, उसने पूरे बैतूल ही नहीं, बल्कि इस कहानी को सुनने वाले हर व्यक्ति के दिल को छू लिया.
आज बैतूल में लोग सिर्फ प्रदीप जैन को ही नहीं, बल्कि उनके उस वफादार साथी डुग्गू को भी याद कर रहे हैं, जिसने जिंदगी से लेकर आखिरी सफर तक अपने मालिक का साथ नहीं छोड़ा. यही वजह है कि श्रद्धांजलि सभा में दोनों को एक साथ सम्मानपूर्वक याद किया गया और यह भावुक पल लंबे समय तक लोगों की यादों में रहेगा.
राजेश भाटिया