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मध्य प्रदेश

जज की परीक्षा पास की, लेकिन चुन लिया संन्यास... विंटेज कारों और शाही बग्गी के साथ प्रखर दीदी को दी गई अनोखी विदाई

राजेश भाटिया
  • बैतूल,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:36 AM IST
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मध्य प्रदेश के बैतूल में एक अनोखा धार्मिक आयोजन देखने को मिला. जज की परीक्षा पास करने के बाद जॉइनिंग से पहले ही प्रखरश्री दीदी ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन दीक्षा का मार्ग चुन लिया.

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उनके साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनों की भी भव्य बिनौली निकाली गई. इस दौरान विंटेज कारें, शाही बग्घियां और उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र रहे.

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बैतूल की सड़कों पर निकले इस चल समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए. जगह-जगह पांचों दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं और जयकारों के साथ स्वागत किया गया. परिवार और समाज के लोगों ने प्रखरश्री दीदी को भावुक माहौल में विदाई दी.

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प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि वह जज की परीक्षा पास करें. उन्होंने यह सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य का भाव था.

 

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उनका कहना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी महावीर के मार्ग पर चलकर कर सकती हैं. इसी विचार के साथ उन्होंने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया.

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बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित बिनौली में विंटेज कारों का काफिला, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड शामिल हुआ. भक्ति और उत्साह के माहौल में पांचों दीक्षार्थी बहनों का अभिनंदन किया गया.

 

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चल समारोह शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जैन दादावाड़ी पहुंचा. यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई.

 

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दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने बताया कि यह उनके सांसारिक जीवन की अंतिम विदाई का समय है. फिलहाल उन्होंने रंगीन वस्त्र पहने हैं, लेकिन दीक्षा के बाद वे सफेद वस्त्र धारण करेंगी.

 

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जानकारी के मुताबिक, प्रखरश्री दीदी सहित पांचों बहनें 22 नवंबर को जैन दीक्षा लेंगी.

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इससे पहले बैतूल में परिवार और जैन समाज की ओर से उनके सम्मान में यह भव्य बिनौली आयोजित की गई.

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