“सब ठीक चल रहा था, एक-दूसरे के दिन की छोटी-बड़ी बातें शेयर होती थीं. फिर अचानक सामने वाले के मैसेजेस कम होने लगे… और एक दिन उसने रिप्लाई करना ही बंद कर दिया.न कोई लड़ाई हुई, न कोई क्लोजर मिला. बस… गायब.” ये है जेन जी प्रॉबलम -'घोस्टिंग'. बस बिना किसी को रीजन बताए गायब हो जाना.
अगर आपने भी कभी ऐसी सिच्युएशन का सामना किया है, तो हो सकता है आप ‘Ghosting’ का शिकार हुए हों. Gen-Z की डेटिंग और सोशल लाइफ में यह शब्द अब काफी आम हो चुका है.
Ghosting क्या होता है?
जब कोई आदमी बिना कोई रीजन बताए या बातचीत खत्म किए अचानक आपके मैसेज, कॉल और कॉन्टैक्ट को पूरी तरह इग्नोर करने लगता है तो इसे Ghosting कहा जाता है. खास बात यह है कि सामने वाला अक्सर कोई एक्सप्लेनेशन या क्लोजर दिए बिना ही दूरी बना लेता है.
वैसे ये सिर्फ रोमांटिक रिलेशनशिप तक सीमित नहीं है, दोस्ती और प्रोफेशनल रिलेशनशिप में भी ऐसा होता है. जहां बात करते करते बिना बताए सामने वाला आपके कॉल, मैसेजेस और टैक्स्ट को इग्नोर करने लगता है. और सामने वाला इस उलझन में पड़ जाता है कि आखिर उसकी गलती क्या है या उसने किया क्या जो उसे इग्नोर किया जा रहा है.
Gen-Z की गई Ghosting हमेशा पर्सनल नहीं होती. जरूरी नहीं कि सामने वाले की किसी बात का बुरा लगा हो या वह उन्हें पसंद नहीं आया हो, इसलिए उन्होंने उसे Ghost कर दिया. कई बार Gen-Z अपनी convenience और comfort के हिसाब से तय करता है कि किससे बात करनी है और किसे जवाब देना है.
अगर उन्हें लगता है कि किसी के साथ उनकी vibe match नहीं हो रही, तो सीधे यह बताने के बजाय वे धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं या कई बार अचानक ही पूरी तरह कट ऑफ कर देते हैं. बातचीत बंद, मैसेज का जवाब बंद और सामने वाला बस सोचता रह जाता है कि आखिर हुआ क्या.
Ghosting इतना परेशान क्यों करता है?
प्रॉबलम सिर्फ किसी के चले जाने की नहीं होती, बल्कि सवालों से भी होती है-'आखिर हुआ क्या?”, कई तरह के सवाल और सेल्फ डाउट मन में उठने लगते है. और बिना किसी जवाब के ये सवाल बार-बार दिमाग में घूमते हैं. घोस्ट हुआ व्यक्ति खुद को ब्लेम करने लगता है, अपनी कॉन्वरसेशन्स को दोबारा याद करता है, उसे बार-बार पड़ता है और सामने वाले के सोशल मीडिया पर जवाब ढूंढने लगता है. इससे एंग्जायटी, सेल्फ डाउट और इमोशनल एक्जॉशन बढ़ सकता है.
भारत में भी घोस्टिंग अब सिर्फ Gen-Z का बजवर्ड नहीं रह गया है. इसके लोगों की मेंटल स्टेट पर पड़ने वाले असर को लेकर भी रिसर्च हो रही है. 2025 में International Journal of Indian Psychology में प्रकाशित एक study में डेटिंग का एक्सपीरियंस रखने वाले 18 से 25 साल के 119 भारतीय युवाओं को शामिल किया गया. इस रिसर्च में Ghosting, रिजेक्शन के डर और कॉन्फिडेंस के बीच रिलेशन को समझने की कोशिश की गई.
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग रिजेक्शन को लेकर ज्यादा सेंसिटिव होते हैं, उनके Ghosting का एक्सपीरियंस करने की संभावना भी जुड़ी हुई पाई गई. वहीं, Ghosting का अनुभव और व्यक्ति के कॉन्फिडेंस के बीच भी संबंध देखा गया. यानी किसी का बिना कोई वजह बताए अचानक गायब हो जाना सिर्फ बातचीत खत्म होने की बात नहीं है, इसका असर व्यक्ति की फीलिंग्स और खुद को लेकर उसकी सोच पर भी पड़ सकता है.
तो Ghosting से बाहर कैसे निकलें?
घोस्टिंग फेज से बाहर निकलने का कोई फिक्स्ड सॉल्यूशन तो नहीं है लेकिन कुछ तरीके है जिसे फॉलो करने से हम उससे उभर सकते है. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किसी का बिना बताए चले जाना आपकी वैल्यू तय नहीं करता. हर सवाल का जवाब मिलना जरूरी नहीं होता और कई बार क्लोजर सामने वाले से नहीं, खुद से लेना पड़ता है.
बार-बार मैसेज करने या सोशल मीडिया पर उन्हें स्टॉक करने के बजाय थोड़ा डिस्टेंस लें. अपने रुटीन, दोस्तों और उन चीजों पर ध्यान दें जो आपको इमोशनली ग्राउंडेड रखती हैं. जरूरत लगे तो अपनी फीलिंग्स किसी ट्रस्टवर्दी व्यक्ति से शेयर करें.
Ghosting को अपनी कहानी का आखिरी चैप्टर समझना सबसे बड़ी गलती होगी. हर सवाल का जवाब सामने वाले से मिले, ये जरूरी नहीं. कभी-कभी रिप्लाई न आना भी एक रिप्लाई होता है. इसलिए क्लोजर के लिए बार-बार पीछे देखने के बजाय खुद को प्रायरिटी दें और मूव ऑन को ही Ghosting का सबसे सही सॉल्यूशन मानना चाहिए क्योंकि किसी के अचानक गायब हो जाने से आपकी लाइफ पॉज नहीं हो जाती.
सारा सिंह