सिर्फ दवा ही नहीं, नए तरीके से 50% तक कम होगा बुरा कोलेस्ट्रॉल, IIT के वैज्ञानिकों ने बताया कैसे

आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने कोलेस्ट्रॉल कम करने का एक सुरक्षित तरीका खोज लिया है. 'KTDP' पेप्टाइड के जरिए लिवर से खून में जाने वाले बैड फैट को रोककर कोलेस्ट्रॉल को 50% तक कम करना मुमकिन होगा. यह तकनीक भविष्य में हृदय रोगों के इलाज के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

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नई तकनीक से कम होगा बैड कोलेस्ट्रॉल. (Phot: ITG) नई तकनीक से कम होगा बैड कोलेस्ट्रॉल. (Phot: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

'बैड कोलेस्ट्रॉल' हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है और उसे कम करने के लिए अब एक नई उम्मीद जागी है. आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक की खोज की है जो भविष्य में कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर के इलाज का तरीका बदल सकती है. शोधकर्ताओं ने एक विशेष पेप्टाइड की पहचान की है जो लिवर से खून में हानिकारक फैट के रिलीज को रोकने में सक्षम है. यह रिसर्च उन लोगों के लिए बहुत मायने रखती है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए पारंपरिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स से जूझ रहे हैं. आइए जानते हैं कि यह नया तरीका कैसे काम करता है.

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कैसे काम करती है यह नई तकनीक?

वैसे तो कोलेस्ट्रॉल की दवाएं लिवर में कोलेस्ट्रॉल के बनने की प्रक्रिया या रिसेप्टर्स को निशाना बनाती हैं जिसके कई साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. लेकिन आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना है. उन्होंने काइनिसिन-1 नामक मोटर प्रोटीन के एक छोटे हिस्से 'KTDP' पेप्टाइड का उपयोग किया है.

यह पेप्टाइड लिवर के अंदर फैट की बूंदों को एक जगह से दूसरी जगह जाने से रोकता है. जब ये फैट ड्रॉपलेट्स सही जगह तक नहीं पहुँचते, तो वे बैड कोलेस्ट्रॉल' (VLDL) में नहीं बदल पाते और इस तरह खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नहीं बढ़ता.

क्या यह सुरक्षित है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इससे लिवर में फैट जमा नहीं होता जिससे फैटी लिवर का खतरा नहीं बढ़ता. आमतौर पर जब हम फैट का ट्रांसपोर्ट रोकते हैं तो डर रहता है कि वह लिवर में ही जमा होने लगेगा लेकिन इस प्रयोग में फैट सेल्स में ही ब्रेकडाउन होकर एनर्जी में बदल जाता है.

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चूहों और जेब्राफिश पर किए गए प्री-क्लिनिकल ट्रायल में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में 50% तक की गिरावट देखी गई है. यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है क्योंकि यह बिना किसी हानिकारक प्रभाव के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का रास्ता दिखाता है.

भविष्य की उम्मीद

हालांकि यह रिसर्च अभी शुरुआती स्टेज में है और इंसानों पर इसका टेस्टिंग होना बाकी है लेकिन यह हृदय रोगों से लड़ने में एक नई दिशा दे रही है. अकॉर्डिंग टू हार्वर्ड हेल्थ, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण है.

आईआईटी बॉम्बे की यह खोज भविष्य में ऐसी दवाओं के निर्माण में मदद कर सकती है जो पारंपरिक स्टैटिन से कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित साबित हो सकती हैं.
 

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