रसोई में अंडे की कोई भी रेसिपी बनती हो, लेकिन इसके बाद उसका छिलका अक्सर सीधे कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं. जिन छिलकों को आप बेकार समझकर फेंक देते हैं, वही आपके पौधों के लिए कैल्शियम से भरपूर ऑर्गेनिक खाद बनाई जा सकती है. अंडे के छिलकों में कैल्शियम पाया जाता है और इसी वजह से गार्डनिंग में इनका इस्तेमाल किया जाता है. खासकर फूल और फल वाले पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए कैल्शियम काफी जरूरी होता है.
हालांकि, अगर आप सोचें कि सिर्फ अंडे के छिलकों को पीसकर मिट्टी में डाल देने से आपके पौधे हरे-भरे और फलों से लद जाएंगे तो ऐसा नहीं है.छिलके कठोर होने की वजह से इनके टूटने और मिट्टी में मिलकर उसे पोषक बनाने में समय लग सकता है. ऐसे में इन्हें सिरके के साथ मिलाकर लिक्विड रूप में तैयार करने का तरीका अपनाया जाता है. आइए जानते हैं अंडे के छिलकों से घर पर कैसे लिक्विड ऑर्गेनिक खाद बनाई जा सकती है और उसके कैसे इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
अंडे के छिलकों से क्यों बनाएं लिक्विड खाद?
अंडे के छिलके मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं. ऐसे में इनमें कैल्शियम अच्छी-खासी मात्रा में होता है, जो पौधों की ग्रोथ के लिए जरूरी होता है. अगर पौधे में कैल्शियम की कमी हो जाए तो उसकी नई पत्तियों और शाखाओं की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है.
इसी वजह से गार्डनिंग में अंडे के छिलकों का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर लोग इन्हें पीसकर सीधे मिट्टी में डाल देते हैं, लेकिन छिलकों को सिरके के साथ मिलाकर लिक्विड खाद तैयार की जा सकती है, ताकि इसमें मौजूद कैल्शियम घोल में आ सके.
सिरके के साथ मिलाने पर क्या होता है?
अंडे कि छिलकों से लिक्विड फर्टिलाइजर बनाने के लिए उन्हें सिरके में भिगोकर रखा जाता है. सिरका छिलके के साथ रिएक्शन करता है, जिससे इसमें बुलबुले और झाग बनने लगते हैं. ये इस बात का संकेत है कि सिरका छिलके को धीरे-धीरे घोल रहा है.
कुछ समय बाद अंडे का छिलके सॉफ्ट होकर टूटने लगते हैं और उसमें मौजूद कैल्शियम का कुछ हिस्सा सिरके में मिल जाता है. तैयार घोल को पानी में मिलाकर यानी पतला करके पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
घर पर ऐसे तैयार करें अंडे के छिलकों की लिक्विड खाद
इसे बनाने के लिए आपको ज्यादा सामान की जरूरत नहीं होगी. करीब 5-6 अंडों के साफ और सूखे छिलके और सिरका लिया जा सकता है.
1. सबसे पहले अंडे के छिलकों को हल्का तोड़ लें या छोटे टुकड़ों में कर लें. अब इन्हें एक कांच के जार में डालें. इसके बाद इतना सिरका डालें कि छिलके अच्छी तरह उसमें डूब जाएं.
2. सिरका डालते ही बुलबुले और झाग बनने लगेंगे. ये नॉर्मल रिएक्शन है. मिश्रण को करीब 48 घंटे के लिए रखा जा सकता है. इस दौरान छिलके धीरे-धीरे टूटेंगे और उनका कैल्शियम घोल में आने लगेगा.
2 दिन बाद छान लें मिश्रण
करीब 2 दिन बाद छिलके काफी नरम हो जाएंगे. अब इस मिश्रण को एक छलनी की मदद से अच्छी तरह छान लें, ताकि बचे हुए छिलके अलग हो जाएं और सिर्फ लिक्विड बच जाए. इस लिक्विड को सीधे पौधों में न डालें. पहले इसे पानी में मिलाकर पतला करें, फिर ही पौधों में इस्तेमाल करें.
1 लीटर पानी में कितना डालें?
इस घोल को पौधों में डालने से पहले इसे पानी में मिलाकर पतला कर लें. 1 लीटर पानी में करीब 5 मिली घोल डालें. यानी 4 लीटर पानी के लिए करीब 20 मिली घोल काफी है. अब इसे अच्छी तरह मिलाएं और पौधे की मिट्टी में डाल दें. इसका इस्तेमाल बड़े हो चुके फूल और फल देने वाले पौधों में किया जा सकता है.
छोटे पौधों में डालने से बचें, शाम को करें इस्तेमाल
इस घोल को बहुत छोटे-छोटे पौधों में डालने से बचें. इसे अच्छी तरह डेवलप और बड़े पौधों में ही इस्तेमाल करना ही अच्छा रहता है. शुरुआत में कम मात्रा में घोल डालें और पौधे पर इसका असर देखें.
इसे तेज धूप में डालने की बजाय शाम के समय पौधे की मिट्टी में डालें. इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे मिट्टी में डालना बेहतर रहेगा, ताकि घोल जड़ों तक पहुंच सके.
फूल-फल वाले पौधों के लिए कर सकते हैं इस्तेमाल
इस लिक्विड खाद का इस्तेमाल उन पौधों में किया जा सकता है, जिनमें फूल या फल आने शुरू हो गए हैं. जैसे टमाटर, मिर्च, बैंगन और दूसरे फल-सब्जी वाले पौधे.
हालांकि, सिर्फ इस घोल को डालने से फूल या फल नहीं झड़ेंगे या पौधे में ज्यादा फल आएंगे, ऐसा जरूरी नहीं है. पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए सही धूप, पानी, अच्छी मिट्टी और दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी जरूरी होते हैं.
कितने दिन तक रख सकते हैं?
तैयार घोल को साफ और बंद बोतल में रखें. इस्तेमाल से पहले अगर अजीब सी महक या फफूंद दिखे तो इसे पौधों में न डालें. सिरका एसिडिक होता है, इसलिए घोल को हमेशा पानी में मिलाकर लिमिटेड मात्रा में ही इस्तेमाल करें. इस तरह अंडे के छिलकों से घर पर कम खर्च में लिक्विड खाद तैयार की जा सकती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क