Home Construction Tips: घर बनाना लोगों का सपना होता है. ऐसे में जब भी वो अपने सपनों का घर बनाते हैं, तो हर चीज पर बारीकी से गौर फरमाते हैं. लोग कमरे से लेकर किचन, बालकनी और फर्नीचर तक के डिजाइन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन एक चीज ऐसी है जिसे वो अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. क्या? वो हैं सीढ़ियां. सीढ़ियों के डिजाइन को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि सीढ़ियां ऐसी जगह हैं, जिनका इस्तेमाल दिन में एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार होता है. अगर इनकी ऊंचाई या चौड़ाई सही नहीं है, तो ऊपर-नीचे आने-जाने में थकान तो होगी ही, साथ ही पैर फिसलने या ठोकर लगने का खतरा भी बढ़ सकता है.
इसी वजह से सीढ़ियों की डिजाइनिंग में एक आसान सा नियम काफी चर्चा में रहता है, जिसे 7-11 रूल कहा जाता है. नाम सुनकर आपको लग सकता है कि इसका मतलब सीढ़ियों के नंबर से है, लेकिन ऐसा नहीं है. ये दरअसल हर सीढ़ी की ऊंचाई और उस पर पैर रखने की जगह के बीच सही कॉम्बिनेशन से जुड़ा है. चलिए जानते हैं क्या है 7-11 रूल.
क्या है सीढ़ियों का 7-11 Rule?
7-11 रूल को आसान भाषा में समझें तो इसमें बताया जाता है कि सीढ़ी की ऊंचाई करीब 7 इंच होनी चाहिए और पैर रखने वाली जगह की गहराई करीब 11 इंच रखी जानी चाहिए. यानी एक कदम ऊपर जाने के लिए पैर को बहुत ज्यादा ऊंचा नहीं उठाना पड़ता और पैर रखने के लिए भी पूरी जगह मिलती है.
यही बैलेंस सीढ़ियों को चलने में ज्यादा कंफर्टेबल बनाता है. हालांकि, ये कोई ऐसा स्ट्रिक्ट रूल नहीं है जिसे हर घर में बिल्कुल इसी नाप के साथ फॉलो किया जाना जरूरी हो. लेकिन इसे कंफर्टेबल सीढ़ियां बनाने का एक आसान रूल माना जाता है.
आखिर 7 और 11 का ही हिसाब क्यों?
सीढ़ियों पर चलते समय लोगों के कदम एक जैसे तरीके से आगे बढ़ते हैं. अगर सीढ़ी ज्यादा ऊंची होगी, तो हर कदम पर पैर ज्यादा ऊपर उठाना पड़ेगा, जिससे चढ़ते समय जल्दी थकान हो सकती है. वहीं, पैर रखने की जगह कम होने पर पैर ठीक से नहीं टिक पाता.
7 इंच की ऊंचाई और 11 इंच की गहराई इन दोनों चीजों के बीच एक अच्छा बैलेंस बनाती है. इसी वजह से ये कॉम्बिनेश लंबे समय से सीढ़ियों के कंफर्टेबल डिजाइन के लिए इस्तेमाल होता रहा है.
सीढ़ियां बहुत ऊंची हों तो क्या परेशानी होती है?
मान लीजिए किसी सीढ़ी की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा रख दी गई. ऐसी सीढ़ियों पर चढ़ते समय हर बार पैर को ज्यादा ऊपर उठाना पड़ेगा. इससे सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल और थकाऊ लग सकता है.
खासकर बच्चों, बुजुर्गों या ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें सीढ़ियां चढ़ने में पहले से परेशानी होती है उसके लिए गलत नाप वाली सीढ़ियां चढ़ना परेशानी भरा हो सकता है.
बहुत कम गहरी सीढ़ियां भी ठीक नहीं
सिर्फ ऊंचाई कम रखना ही काफी नहीं है. पैर रखने की जगह यानी ट्रेड भी अच्छी तरह से गहरी होनी चाहिए. अगर ये हिस्सा बहुत छोटा होगा तो पैर का पूरा तलवा सीढ़ी पर नहीं टिक पाएगा. इससे ऊपर चढ़ते और खासकर नीचे उतरते समय बैलेंस बिगड़ सकता है. इसलिए सीढ़ी की ऊंचाई और गहराई दोनों का सही तालमेल जरूरी है.
सीढ़ियों की सभी स्टेप एक जैसी होना भी जरूरी
सिर्फ पहली सीढ़ी की नाप सही रखने से काम नहीं चलेगा. पूरी सीढ़ी में हर स्टेप की ऊंचाई लगभग एक जैसी होनी चाहिए. एक सीढ़ी अचानक ज्यादा ऊंची या कम ऊंची हो जाए तो पैर उसी पुराने अंतर के हिसाब से कदम बढ़ाता है और ठोकर लगने का खतरा बढ़ सकता है.
7-11 Rule को घर बनवाते समय कैसे समझें?
घर बनवाते वक्त इस बात का ध्यान हमेशा रखें:
7 = एक सीढ़ी की करीब 7 इंच ऊंचाई
11 = पैर रखने वाली जगह की करीब 11 इंच गहराई
ये एक आसान शुरुआती गाइड है. असली सीढ़ी बनाते समय घर की कुल ऊंचाई, सीढ़ियां बनाने के लिए कितनी जगह उपलब्ध है और बिल्डिंग रूल्स के हिसाब से सीढ़ियों का नाप तय करनी चाहिए. अलग-अलग देशों और बिल्डिंग्स के लिए नियम अलग हो सकते हैं.
सीढ़ियां बनवाने से पहले ये गलती न करें
घर में सीढ़ियां बनवाते समय सिर्फ ये देखकर फैसला न करें कि सीढ़ियां देखने में खूबसूरत लग रही हैं या जगह कम ले रही हैं. डिजाइन के साथ उनकी ऊंचाई, गहराई और हर कदम की समानता भी देखना जरूरी है. क्योंकि सीढ़ियों का असली मकसद सिर्फ घर को खूबसूरत बनाना नहीं, बल्कि रोजाना ऊपर-नीचे आने-जाने को कंफर्टेबल और सुरक्षित बनाना है. और यही वजह है कि 7-11 Rule जैसा आसान हिसाब सीढ़ियों की डिजाइन में काफी काम आता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क