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नक्काशीदार झरोखे और पत्थर की दीवारें...ऐसा दिखता है सैफ अली खान के जीजा कुणाल खेमू का कश्मीर वाला पुश्तैनी घर, PHOTOS

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:20 AM IST
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पटौदी खानदान की शहजादी और सैफ अली खान की छोटी बहन सोहा अली खान के पति एक्टर कुणाल खेमू का नाम सुनते ही मुंबई की चमक-दमक और फिल्मी दुनिया याद आती है. लेकिन उनका कश्मीर की खूबसूरत वादियों से बहुत गहरा और भावुक रिश्ता रहा है. उनके परिवार का एक घर ऐसा भी है, जहां आज भी पुराने कश्मीर की झलक देखने को मिलती है. ये वही पुश्तैनी घर है, जिसे उनका परिवार सालों पहले छोड़कर चला गया था. कुछ दिनों पहले कुणाल खेमू की बहन करिश्मा खेमू अपनी मां और पिता के साथ श्रीनगर स्थित अपने पुश्तौनी घर में पहुंचीं और घर के अंदर की कई झलकियां सोशल मीडिया पर साझा कीं.

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इस घर को देखकर इसके इंटीरियर या कोई खास लग्जरी से ज्यादा इसकी पुरानी उम्र और इससे जुड़ी यादें ध्यान खींचती हैं. लकड़ी की नक्काशी, पत्थर की दीवारें, पुराने दरवाजे-खिड़कियां, लकड़ी की बालकनी और घर के अलग-अलग कमरे आज भी उस दौर की कहानी कहते हैं. ये घर देखने में बिल्कुल किसी आम घर जैसा है. इसमें किसी तरह की कोई महंगी या लग्जरी चीज नहीं लगी है. खास बात ये है कि कभी जिस घर में पूरा परिवार साथ रहता था, आज उसी में अलग-अलग हिस्सों को किराए के कमरों में बांट दिया गया है.

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आज भी दिखती है कश्मीर की खास वास्तुकला
कुणाल खेमू का ये पुश्तैनी घर श्रीनगर में है और इसे देखकर पुराने कश्मीर की पारंपरिक वास्तुकला का अंदाजा लगाया जा सकता है. कई मंजिलों में बने इस घर में पत्थर और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है. ऊपर की मंजिलों पर पत्थर की दीवारें और गहरे रंग की लकड़ी के फ्रेम नजर आते हैं, जबकि नीचे का प्लास्टर किया हुआ है.

घर बहुत ही पुराने समय में बनाया गया था. ऐसे में कहीं पेंट फीका पड़ चुका है तो कहीं प्लास्टर उखड़ा हुआ नजर आता है. लकड़ी के कुछ हिस्से भी काफी पुराने और घिसे हुए दिखते हैं. 

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इस घर की सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली चीजों में इसकी लकड़ी की बालकनी शामिल है. ऊपरी मंजिल पर बनी बालकनी लकड़ी के नक्काशीदार खंभों और सजावटी रेलिंग से बनी है. इसकी डिजाइन में पुराने कश्मीरी घरों की झलक मिलती है.

बालकनी के आसपास लगे लकड़ी के हिस्से अब काफी पुराने हो चुके हैं, लेकिन नक्काशी और कारीगरी आज भी साफ दिखाई देती है. यही हिस्सा घर को एक अलग तरह का पुराना और रॉयल लुक देता है.

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घर के ऊपरी मंजिलों पर खुली हुई पत्थर की चिनाई दिखाई देती है. इसके साथ गहरे भूरे रंग की लकड़ी की खिड़कियां लगी हुई हैं. कुछ खिड़कियों पर पर्दे नजर आते हैं. घर की कई खिड़कियां वक्त के साथ काफी पुरानी हो चुकी हैं.

लकड़ी और पत्थर का ये कॉम्बिनेशन पूरे घर को कश्मीर के पुराने ट्रेडिशनल घरों जैसा लुक देता है. घर का इंटीरियर किसी मॉडर्न लग्जरी हाउस की तरह चमकदार नहीं है, बल्कि इसमें पुरानी चीजों और बीते वक्त की छाप साफ दिखाई देती है.

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करिश्मा ने घर के अंदर घूमते हुए अपनी मां से अलग-अलग कमरों के बारे में बात की. उनकी मां ने बताया कि शादी के बाद वो और उनके पति घर की ऊपरी मंजिल पर सोते थे.

करिश्मा ने घर के एक कमरे की ओर इशारा करते हुए बताया कि ये उनकी मां का कमरा था और उनके पिता यहां पढ़ाई किया करते थे. परिवार के लिए घर का लगभग हर कमरा किसी न किसी पुरानी याद से जुड़ा हुआ है.

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घर की पुरानी सीढ़ियां भी परिवार की यादों का हिस्सा हैं. करिश्मा की मां ने बताया कि एक बार उनकी बहन इन्हीं सीढ़ियों से गिर गई थीं. सीढ़ियां बहुत ही छोटी-छोटी और संकरी नजर आती हैं, जिन पर पत्थर नहीं बल्कि सिर्फ पेंट हुआ था. 

आज ये सीढ़ियां भी समय के असर को दिखाती हैं. घर के कुछ हिस्सों में लाइट भी नहीं थी और कई कमरे बंद पड़े थे. 

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इस पुश्तैनी घर की सबसे दिलचस्प बात ये है कि समय के साथ इसका इस्तेमाल पूरी तरह बदल गया. करिश्मा ने बताया कि कभी उनका पूरा परिवार जिस बड़े घर में रहता था, अब वह छोटे-छोटे हिस्सों और कमरों में बंट चुका है. आज इस घर के अलग-अलग कमरों में दूसरे लोग किराए पर रहते हैं.  

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इस पूरे घर की कहानी को भावुक बनाने वाली बात सिर्फ इसकी पुरानी कश्मीरी झलक नहीं, बल्कि इससे जुड़ा परिवार का अतीत है. करिश्मा ने अपने वीडियो में बताया कि जिस घर को परिवार को एक रात में छोड़ना पड़ा था, वहां वे सालों बाद फिर लौटे.

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सालों बाद श्रीनगर की उन्हीं गलियों से गुजरते हुए परिवार जब घर की दहलीज तक पहुंचा तो पुराने कमरे, सीढ़ियां, खिड़कियां और घर का हर कोना बीते वक्त की यादें वापस ले आया. कुणाल खेमू की बहन से लेकर माता-पिता तक घर के हर कोने में यादों को तलाश रहे थे.

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