आठ राज्यों में बने लव जिहाद कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती, 3 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत आठ राज्यों में बने लव जिहाद कानून के खिलाफ सुुप्रीम कोर्ट में चुनौती याचिका दाखिल की गई थी. अब इस कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी.

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आठ राज्यों में बने लव जिहाद कानून को चुनौती, SC में टली सुनवाई आठ राज्यों में बने लव जिहाद कानून को चुनौती, SC में टली सुनवाई

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST

लव जिहाद कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत आठ राज्यों में बने कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. अब सुप्रीम कोर्ट 3 फरवरी को इस मामले में सुनवाई करेगा.

सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं पर ट्रांसफर याचिका अभी लिस्ट नहीं हुई है. इसलिए सभी याचिकाओं पर एक साथ शुक्रवार को सुनवाई करेंगे. एक याचिकाकर्ता ने कई राज्यों के जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है. राज्यों को आगे आकर शीघ्र जवाब दाखिल करना चाहिए.

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3 फरवरी को SC में होगी सुनवाई

जमीयत उलमा ए हिंद ने इन कानूनों से जुड़ी विभिन्न हाई कोर्ट्स में लंबित 21 याचिकाओं को भी सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की. धर्मांतरण के खिलाफ 8 राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों का मुद्दे पर देश में कई हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं पर सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम शुक्रवार को मामले पर सुनवाई करेंगे. तभी ट्रांसफर वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी करने पर विचार करेंगे.

आपसी सहमति से विवाह करने वाले हो रहे प्रभावित

याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्यों द्वारा बनाए गए कानून पर्सनल लॉ के आड़े आ रहे हैं. यह बहुत ही अजीब स्थिति है. दो अलग धर्म के जिन लोगों ने आपसी रजामंदी से विवाह किया है वो सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. अभाव, दबाव या प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध तरीके से धर्मांतरण/लव जिहाद के खिलाफ उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक ने भी अब तक कानून बनाए हैं. 

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SC ने बताया खतरा

हालांकि पिछली सुनवाईयों के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दबाव या प्रभाव डालकर धर्मांतरण को देश और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा भी बताया है.

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