रेसलर्स यौन उत्पीड़न केस में सुनवाई पूरी, बृजभूषण शरण सिंह पर 3 अगस्त को कोर्ट सुनाएगा फैसला

कोर्ट ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला रेसलर्स के यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई पूरी कर ली है. कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल केस में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसे 3 अगस्त को सुनाया जाएगा.

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बीजेपी के पूर्व सांसद हैं बृजभूषण शरण सिंह (Photo: ITG) बीजेपी के पूर्व सांसद हैं बृजभूषण शरण सिंह (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:31 AM IST

महिला रेसलर्स के यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुनवाई पूरी कर ली है. कोर्ट ने अब इस केस में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो 3 अगस्त को सुनाया जाएगा. अदालत ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी बातें लिखित में देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. पांच महिला पहलवानों के गंभीर आरोपों से घिरे इस केस में अब सबकी नजरें अगस्त के पहले हफ्ते पर हैं.

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सुनवाई के अंतिम चरण में कोर्ट रूम के भीतर दोनों पक्षों की तरफ से कानूनी बहस देखने को मिली. शिकायतकर्ता रेसलर्स की तरफ से पेश सीनियर वकील ने अपनी अंतिम दलीलें रखते हुए कोर्ट से गुहार लगाई कि इन गंभीर आरोपों के लिए आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए. वहीं दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकील ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि यह पूरा केस मनगढ़ंत कहानियों पर आधारित है, जिसका मकसद सिर्फ सामाजिक छवि को खराब करना था. उन्होंने कोर्ट से मामले में तुरंत बरी करने की मांग की. फिलहाल दोनों आरोपी जमानत पर बाहर हैं.

कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद

यह पूरा मामला साल 2023 में तब शुरू हुआ था, जब देश के बड़े रेसलर्स ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था. इन खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि उनके साथ गलत व्यवहार, यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने जैसी घटनाएं हुईं. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसके दखल के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी. पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट में विनोद तोमर को भी सह-आरोपी बनाया था, जिन पर इस पूरे विवाद में साथ देने का आरोप है.

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पुलिस की लंबी जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी. इस चार्जशीट में महिला पहलवानों का पीछा करने, उनके साथ जबरदस्ती करने, मानहानि करने और धमकी देने जैसे कई गंभीर अपराध शामिल किए गए थे. मई 2024 में कोर्ट ने इन आरोपों को सही मानते हुए बकायदा मुकदमा यानी ट्रायल चलाने का आदेश दिया था. तब से लेकर अब तक कोर्ट में गवाहों के बयान और लंबी जिरह चल रही थी. पुलिस ने अपनी दलीलों में यह भी दावा किया था कि खिलाड़ियों को करियर बचाने के लिए चुप रहने की धमकियां मिलती थीं.

जब कोर्ट ने पहली बार आरोप तय किए थे, तब आरोपी पक्ष ने इन सभी बातों को गलत बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी. अब कोर्ट रूम के भीतर की सभी बहस और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं. खेल जगत के इस सबसे बड़े कानूनी विवाद पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह मामला एथलीटों की सुरक्षा और खेल प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ा है. अब 3 अगस्त को आने वाला फैसला ही यह तय करेगा कि इन गंभीर आरोपों का सच क्या है और कानूनी तौर पर अगला कदम क्या होगा.

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