शराब लिक्विड है. लिक्विड को लीटर या मिलीलीटर में मापा जाता है. लिक्विड या तरल को मापने का यही इंटरनेशनल स्टैंडर्ड है. इस हिसाब से 1000 मिली लीटर यानी एक लीटर एक फुल यूनिट हुआ और उसका आधा हाफ हुआ. लेकिन, शराब के मामले में हिसाब- किताब थोड़ा अलग है. खासकर अगर भारत की बात करें तो यहां शराब की फुल, हाफ और क्वार्टर की बोतल का पूरा पैमाना ही बदल जाता है.
कायदे से1000 एमल का एक फुल यूनिट होना चाहिए और हाफ 500 एमल का. लेकिन, भारत में शराब की फुल बोतल यानी एक यूनिट 1000 एमएल या एक लीटर की नहीं होती है. यहां एक फुल बोतल 750 एमएल की होती है. इसी तरह 375 एमल वाली बोतल को हाफ कहते हैं. हिंदी में स्थानीय बोली और भाषा में हम इसे खंभा, अद्धा और पौव्वा भी बोल देते हैं.
फिर भी सवाल वही बना हुआ है कि शराब के मामले में इसे मापने के मानक क्यों बदल जाते हैं. शराब की बोतल 1000 एमएल, 500 एमएल और 250 एमएल के क्यों नहीं होते. इस सवाल का जवाब छिपा है, दुनियाभर में शराब परोसने की इंटरनेशनल यूनिट में. पूरी दुनिया में औंस के हिसाब से शराब परोसे जाते हैं. एक औंस में करीब 29 एमएल होते हैं, जो 30 एमएल के करीब है.
भारत में शराब पीने- पिलाने की संस्कृति पर भी अंग्रेजों का काफी प्रभाव रहा है. क्योंकि अंग्रेज एक औंस यानी करीबन 30 एमएल का स्मॉल पैग यूज करते थे. इस तरह 60 और 90 एमएल का लार्ज पैग होता था. इसी पैग के हिसाब से ही शराब की बोतलें भी बनाई जाने लगीं.
30 और 60 एमएल के मल्टीपल के हिसाब से 3 लार्ज पैग यानी 180 एमएल की क्वार्टर, 6 लार्ज पैग मिलाकर एक हाफ और 12 लार्ज और एक स्मॉल पैग से मिलकर एक फुल बना. इस तरह ब्रिटेन और भारत में शराब के फुल बोतल का मतलब 1000 एमएल नहीं, बल्कि सिर्फ 750 एमएल होता है.
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